बिहार के सरकारी स्कूलों में मिड डे मील योजना के संचालन में लापरवाही को लेकर शिक्षा विभाग ने सख्ती दिखाई है. विभाग ने राज्य के 30 जिलों के जिला कार्यक्रम पदाधिकारियों (DPO) से स्पष्टीकरण मांगा है. कई जिलों में 85 फीसदी या उससे कम स्कूलों में ही बच्चों को मध्याह्न भोजन दिया जा रहा है. यह मामला ई-शिक्षाकोष पोर्टल के आंकड़ों की समीक्षा में सामने आया है. अधिकारियों को दो दिनों के भीतर जवाब देने का निर्देश दिया गया है.
शिक्षा विभाग ने मिड डे मील योजना के संचालन की समीक्षा के बाद संबंधित जिलों के अधिकारियों से जवाब मांगा है. 22 अक्टूबर तक के आंकड़ों की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए समीक्षा की गई थी. इसमें कई जिलों में योजना के संचालन की स्थिति संतोषजनक नहीं पाई गई. इसके बाद विभाग ने कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की है. शिक्षा विभाग के निदेशक विनायक मिश्रा ने इस संबंध में आदेश जारी किया है.
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कई जिलों में 85 फीसदी या कम स्कूलों में योजना
ई-शिक्षाकोष पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार, कई जिलों में 85 फीसदी या उससे कम स्कूलों में ही मिड डे मील योजना संचालित हो रही है. इस योजना का उद्देश्य सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना है. योजना के संचालन में कमी से बच्चों को मिलने वाले भोजन पर असर पड़ सकता है. विभाग ने सभी संबंधित अधिकारियों से स्थिति स्पष्ट करने को कहा है.
दो दिनों में जवाब देने का निर्देश
शिक्षा विभाग ने संबंधित DPO को दो दिनों के भीतर स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया है. साथ ही, सभी सरकारी स्कूलों में मिड डे मील योजना का नियमित संचालन सुनिश्चित करने को कहा गया है. विभाग ने स्पष्ट किया है कि बच्चों को भोजन उपलब्ध कराने में लापरवाही मिलने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सकती है.
भोजन की गुणवत्ता जांचने के भी निर्देश
इससे पहले भी स्कूलों में मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठ चुके हैं. अरवल समेत कुछ जिलों में खाद्य सामग्री की गुणवत्ता से जुड़ी शिकायतें सामने आई थीं. इसके बाद चावल, दाल, तेल और मसालों की गुणवत्ता तथा एक्सपायरी डेट की जांच के निर्देश दिए गए. भोजन परोसने से पहले रसोइया, प्रधानाध्यापक और शिक्षक को उसकी गुणवत्ता जांचनी होगी. विभाग का जोर है कि बच्चों को नियमित और सुरक्षित भोजन मिले.
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