बिहार में विधानपरिषद की नौ सीटों के लिए द्विवार्षिक चुनाव 18 जून को होंगे. इसके साथ ही पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा सदस्य बनने के बाद रिक्त हुई एक सीट पर उपचुनाव भी कराया जाएगा. इस बीच एक सीट के लिए विपक्ष के बीच पेंच फंसता हुआ नजर आ रहा है. एक तरफ आरजेडी तो दूसरी तरफ एआईएमआईएम दावेदार ठोंक रही है.

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हलांकि परिणाम चाहे जो भी हो, लेकिन इतना तय है कि विधान परिषद की एक सीट के लिए आरजेडी भी अपनी दावेदारी करेगी. इसके लिए महागठबंधन से प्रत्याशी होगा और उसके लिए आरजेडी को एआईएमआईएम से भी सहयोग की जरूरत पड़ेगी. लेकिन ऐसे में प्रत्याशी वही होगा, जिसके नाम पर लालू यादव मुहर लगाएंगे. 

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यह दो नाम रेस में सबसे आगे

इस बीच विधान परिषद के लिए दो नाम सबसे आगे चल रहे हैं. जिसमें एक सुनील कुमार सिंह हैं, जो राबड़ी देवी की पसंद हैं. आरजेडी कोटे से खाली होने वाली एक सीट उन्हीं की है. तेजस्वी यादव चाहते हैं कि शिवचंद्र राम को विधान परिषद भेजा जाए, ताकि अनुसूचित जाति के बीच आरजेडी के प्रति सकारात्मक संदेश जाए.

तेजस्वी यादव ले रहे हैं सभी फैसले

आरजेडी के कार्यकारी अध्यक्ष की हैसियत से पार्टी के लगभग सभी फैसले तेजस्वी यादव ही ले रहे हैं. इस वजह से परिवार की ओर से भी कुछ ज्यादा हस्तक्षेप नहीं होता है. हलांकि तेजस्वी को लालू प्रसाद की सलाह जरूर मिलती रहती है. प्रत्याशी के चयन में भी अब लालू यादव की सलाह जरूरी हो गई है. 

फिलहाल लालू यादव अभी सिंगापुर में हैं और अपने स्वास्थ्य की जांच करा रहे हैं. ऐसे में नामांकन की आखिरी तारीख 8 जून से पहले उनके पटना लौट आने की संभावना जताई जा रही है. विधान परिषद के लिए प्रत्याशी के साथ राबड़ी आवास (10, सर्कुल रोड) पर अंतिम फैसला भी लालू यादव के आने के बाद ही लिया जाएगा.

लालू यादव ही करेंगे प्रत्याशी पर फैसला

अनुसूचित जाति को साधने के उपक्रम में आरजेडी अभी तक पूरी तरह सफल नहीं हो पाई है. तेजस्वी यादव की ए-टू-जेड वाली पहल भी कारगर नहीं रही. उसके बाद आरजेडी बहुत हद तक लालू के बनाए जनाधार को भी थाती मानकर आगे बढ़ रही है.

उसका मूल मुसलमान-यादव हैं, लेकिन अनुसूचित जाति के साथ आरजेडी को राजपूतों का भी बड़ा संबल रहा है. इन दोनों दावेदारों के साथ संबल का यह तर्क एक बराबर हो जाता है. ऐसे में फैसला लालू यादव करेंगे.

एआईएमआईएम चाहती है आरजेडी का समर्थन

एआईएमआईएम के बिहार प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान ने मंगलवार को कहा कि हमने राज्यसभा चुनाव में बतौर विपक्ष तेजस्वी यादव के उम्मीदवार का समर्थन किया था, ऐसे में अब विधान परिषद में उन्हें एआईएमआईएम का समर्थन करना चाहिए.

बिहार विधान परिषद की नौ सीटों पर चुनाव और एक पर उप चुनाव हो रहा है. उनमें दो सीटें (सुनिल कुमार सिंह, मो. फारुख) आरजेडी की हैं. सभी सीटें विधानसभा कोटे की हैं. विधायकों की संख्या के आधार पर महागबंधन के लिए एक से अधिक सीट की गुंजाइश नहीं.

अभी आरजेडी के 25 सहित महागठबंधन में मात्र 35 विधायक हैं. पांच विधायक एआईएमआईएम के हैं. आरजेडी को एआईएमआईएम से सहयोग की अपेक्षा है, जबकि एआईएमआईएम चाहता है कि राज्यसभा चुनाव में किए उपकार का प्रतिदान इस बार आरजेडी करे.

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