बिहार में बाढ़ की स्थिति गंभीर हो गई है. राज्य के 15 जिलों में बाढ़ प्रभावित लोगों की संख्या बढ़कर करीब 48.22 लाख हो गई है. कई प्रमुख नदियां अब भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं. लगातार बारिश और नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों में भारी बारिश को इसकी प्रमुख वजह बताया गया है.

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आपदा प्रबंधन विभाग के मुताबिक, 15 जिलों के 87 प्रखंडों की 575 ग्राम पंचायतों में करीब 48.22 लाख लोग प्रभावित हैं. शुक्रवार शाम तक यह संख्या 47.33 लाख थी. प्रभावित जिलों में पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार, लखीसराय, खगड़िया, पूर्णिया, मधेपुरा और अररिया शामिल हैं.

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गंगा समेत कई नदियां खतरे के ऊपर

भागलपुर के सुल्तानगंज में गंगा खतरे के निशान से 1.98 मीटर ऊपर है. हालांकि यहां जलस्तर में कमी दर्ज की जा रही है. डुमरियाघाट में गंडक, बलतारा और कुर्सेला में कोसी, खगड़िया में बूढ़ी गंडक और कई स्थानों पर गंगा खतरे के निशान से ऊपर बह रही है.

कटाव को लेकर अधिकारियों को अलर्ट

जल संसाधन विभाग ने अचानक नदी किनारे कटाव और तटबंधों को नुकसान की आशंका को देखते हुए संवेदनशील स्थानों पर निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं. अधिकारियों को कटाव या तटबंध टूटने की सूचना मिलते ही तत्काल निरीक्षण कर जरूरी सुरक्षा उपाय शुरू करने को कहा गया है. सितंबर में अब तक 108.8 मिमी बारिश हुई है, जो सामान्य से करीब 20 फीसदी अधिक है.

1,248 सामुदायिक रसोई, 1,794 नावें तैनात

बाढ़ प्रभावितों के लिए विभिन्न जिलों में 1,248 सामुदायिक रसोई और 13 राहत शिविर संचालित हैं. राहत शिविरों में 12,260 लोगों के लिए भोजन, आवास और चिकित्सा की व्यवस्था है. बचाव और परिवहन के लिए 1,794 नावें चलाई जा रही हैं. एसडीआरएफ की 27 और एनडीआरएफ की 10 टीमें तैनात हैं. मौसम केंद्र ने अगले दो दिनों में कई हिस्सों में बादल और कुछ स्थानों पर हल्की बारिश की संभावना जताई है.

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