बिहार में एक बड़े अफसर पर आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) ने बड़ी कार्रवाई की है. नॉर्थ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड में कार्यपालक अभियंता के पद पर तैनात मनोज कुमार रजक के कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की गई. शुरुआती जांच में उनके पास करीब 100 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति होने का खुलासा हुआ है, जिससे विभाग में हड़कंप मच गया है.

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7 ठिकानों पर एक साथ रेड

ईओयू की टीम ने एक साथ सात जगहों पर छापेमारी की. ये ठिकाने मधुबनी, दरभंगा, सुपौल के निर्मली और करजाइन के अलावा पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में स्थित हैं. इतनी बड़ी कार्रवाई को लेकर पूरे इलाके में चर्चा तेज हो गई है. अधिकारियों ने कई घंटों तक सघन तलाशी अभियान चलाया.

जांच के दौरान टीम को भारी मात्रा में संपत्ति से जुड़े दस्तावेज मिले हैं. जानकारी के मुताबिक, सुपौल के करजाइन में तीन मकान और एक गोदाम, निर्मली में एक गोदाम और दरभंगा में एक आलीशान मकान मिला है. इसके अलावा दार्जिलिंग में चाय बागान में साझेदारी से जुड़े कागजात भी मिले हैं. पत्नी के नाम पर दरभंगा-बिरौल रोड पर पेट्रोल पंप के लिए जमीन लीज पर ली गई थी.

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नेपाल तक फैला नेटवर्क

जांच में एक चौंकाने वाली बात सामने आई है. बताया जा रहा है कि मनोज रजक की एक महिला मित्र नेपाल में रहती है, जिसके लिए वहां मकान भी बनवाया गया है. यह जानकारी सामने आने के बाद जांच एजेंसियां और सतर्क हो गई हैं.

जमीन के 17 दस्तावेज और नकदी बरामद

छापेमारी के दौरान जमीन से जुड़े कुल 17 दस्तावेज मिले हैं, जो बिहार के अररिया, दरभंगा, सुपौल और पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी से संबंधित हैं. इसके साथ ही बैंक खातों में करीब सवा चार लाख रुपये जमा होने की जानकारी मिली है, जबकि मौके से लगभग 1.05 लाख रुपये नकद भी बरामद किए गए हैं.

मनोज रजक ने साल 2009 में सहायक अभियंता के तौर पर नौकरी शुरू की थी. लेकिन महज 15-16 साल के भीतर उन्होंने इतनी बड़ी संपत्ति कैसे बनाई, यह अब जांच का मुख्य विषय बन गया है.

ईओयू ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. अधिकारियों का कहना है कि अभी जांच जारी है और आय से अधिक संपत्ति का आंकड़ा आगे और बढ़ सकता है. आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना है.