बिहार विधानसभा चुनाव के रुझान आने शुरू हो गए हैं और कई सीटों पर बेहद कड़ी टक्कर देखने को मिल रही है. शुरुआती बढ़त कभी एनडीए के पास जाती दिख रही है तो कभी महागठबंधन खेल पलटता नजर आ रहा है. मतगणना के हर दौर के साथ मुकाबला और भी रोमांचक होता जा रहा है. आयोग के 9.30 बजे तक के आंकड़ों के अनुसार बीजेपी 21, जदयू 16, राजद 8, लोजपा (रामविलास) 4, कांग्रेस 3 और सीपीआईएमएल 1 सीट पर आगे है.  9.30 बजे तक आयोग ने कुल 53 सीटों पर रुझान जारी कर दिए थे.

बिहार असेंबली इलेक्शन रिजल्ट किस सीट से कौन आगे?

नतीजों के बीच कई सीटों पर मुकाबला बेहद दिलचस्प रहा. मोकामा से अनंत सिंह आगे रहे जबकि चनपटिया में जनसूराज को बढ़त मिली. महुआ सीट पर तेज प्रताप यादव पीछे रहे, वहीं राघोपुर से तेजस्वी यादव आगे दिखाई दिए. छपरा से केसारी लाल यादव ने बढ़त बनाई. लखीसराय, जमुई, सहरसा, दानापुर, औरंगाबाद और बक्सर जैसी सीटों पर बीजेपी के उम्मीदवारों ने मजबूत स्थिति बनाए रखी. इन प्रमुख क्षेत्रों में लगातार बदलते रुझान पूरे दिन राजनीतिक चर्चाओं का केंद्र रहे.

2020 में क्या थे बिहार विधानसभा चुनाव नतीजे?

2020 में आए बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों में एनडीए ने एग्जिट पोल के अनुमान को झुठलाते हुए स्पष्ट बहुमत हासिल किया. 243 सीटों वाली विधानसभा में सरकार बनाने के लिए 122 का आंकड़ा चाहिए था, और एनडीए 125 सीटें जीतकर सत्ता में लौट आया. यह परिणाम इसलिए महत्वपूर्ण रहा क्योंकि पूरे चुनाव के दौरान महागठबंधन की बढ़त की चर्चा थी, लेकिन आखिरकार तस्वीर बिल्कुल उलट दिखी.

एनडीए गठबंधन के घटक दलों में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी. बीजेपी ने 74 सीटें जीतीं जबकि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जेडीयू 43 सीटों पर सिमट गई. इसके अलावा विकासशील इंसान पार्टी को 4 और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) को भी 4 सीटें मिलीं. दूसरी ओर महागठबंधन में आरजेडी को 75 सीटें मिलीं और वह सबसे बड़ी पार्टी रही, जबकि कांग्रेस को 19 सीटों से संतोष करना पड़ा. वामपंथी दलों—भाकपा (मा-ले) को 12 और सीपीआई तथा सीपीएम को 2-2 सीटें मिलीं. अन्य दलों में एआईएमआईएम ने 5, बीएसपी ने 1, एलजेपी ने 1 और एक सीट निर्दलीय के खाते में गई.

बिहार में यह चुनाव दो चरणों में संपन्न हुआ था और पूरे राज्य में राजनीतिक हलचल पूरे अभियान के दौरान बनी रही. एग्जिट पोल ने महागठबंधन को बढ़त दी थी, लेकिन वास्तविक नतीजों ने एक बार फिर बिहार की राजनीतिक बारीकियों और मतदाताओं की चुपचाप की गई पसंद को सामने रखा. एनडीए की जीत ने नीतीश कुमार को दोबारा सत्ता में पहुंचाया और बीजेपी को राज्य में सबसे बड़ी साझेदार की भूमिका दी. यह चुनाव परिणाम बिहार की राजनीतिक दिशा, गठबंधन समीकरणों और भविष्य की रणनीतियों पर गहरा प्रभाव छोड़ता है.