बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नजदीक आते ही राजनीतिक दलों के बीच सीटों के बंटवारे की चर्चाएं तेज हो गई हैं. इसी कड़ी में राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (RLSP) के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा और भाजपा के बीच सीटों पर सहमति बन गई है. पार्टी सूत्रों के अनुसार उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी 6 सीटों पर चुनाव लड़ेगी.

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इन छह सीटों में दिनारा, ओबरा, सासाराम, महुआ, बाजपट्टी और मधुबनी या खजौली शामिल हैं. कुशवाहा ने स्पष्ट किया है कि उनकी पार्टी बिहार के कई इलाकों में मजबूत स्थिति में है और इसे देखते हुए उन्हें महत्वपूर्ण और संवेदनशील विधानसभा सीटें दी जानी चाहिए.

चुनाव में किसको कितनी मिली सीटें?

बिहार में कुल 243 विधानसभा सीटें हैं. इसके मद्देनजर यदि बीजेपी और जेडीयू के सहयोगी छोटे दल सीटों पर झुकाव नहीं दिखाते हैं, तो इन तीनों दलों को लगभग 79 सीटें देनी पड़ेंगी. ऐसे में बीजेपी और जेडीयू के लिए शेष 164 सीटों पर संतोष करना पड़ेगा. सूत्रों के अनुसार, जेडीयू इस बंटवारे में बीजेपी से कम से कम एक सीट अधिक चाहती है. इसका मतलब यह हुआ कि अगर शेष 164 सीटों का बंटवारा किया गया, तो जेडीयू को 83 और बीजेपी को 81 सीटें मिलेंगी.

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6 सीटों पर चुनाव लड़ेगी उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी की 6 तय सीटों में दिनारा, ओबरा, सासाराम, महुआ, बाजपट्टी और मधुबनी या खजौली में से एक सीट शामिल है. हालांकि, अंतिम सूची में मधुबनी और खजौली में से कौन सी सीट RLSP को दी जाएगी, इस पर अभी फैसला होना बाकी है. इन सीटों का चयन इस आधार पर किया गया है कि पार्टी की वर्तमान राजनीतिक स्थिति और क्षेत्रीय लोकप्रियता को ध्यान में रखा गया.

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस गठबंधन से BJP को पिछली बार की तुलना में अधिक ताकत मिल सकती है, खासकर उन सीटों पर जहां RLSP की पकड़ मजबूत रही है. RLSP की हिस्सेदारी से न केवल बीजेपी को वोट बैंक में मदद मिलेगी, बल्कि विपक्षी दलों के लिए यह चुनौती और बढ़ जाएगी. उपेंद्र कुशवाहा का प्रभावी नेतृत्व और उनके समर्थक कई जिलों में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं.

चुनावी प्रचार में जुटेंगे दोनों पार्टी के समर्थक

BJP और RLSP के बीच यह समझौता बिहार में 2025 के विधानसभा चुनाव को और रोमांचक बना देगा. दोनों पार्टियों के कार्यकर्ता अब पूरी ताकत से चुनावी प्रचार में जुटेंगे. खासकर RLSP के स्थानीय उम्मीदवार उन क्षेत्रों में सीधे जनता से जुड़ेंगे जहां पार्टी की पकड़ मजबूत है. इस गठबंधन से यह भी संकेत मिलता है कि भाजपा छोटे सहयोगी दलों के साथ मिलकर विधानसभा में अपनी स्थिति मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है.

राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि आगामी दिनों में ऐसे कई और समझौते देखने को मिल सकते हैं, जिनमें सीटों का बंटवारा और गठबंधन दलों के बीच सहयोग शामिल होगा. यह चुनाव बिहार के लिए निर्णायक साबित हो सकता है और छोटे दलों की भूमिका बड़ी पैमाने पर परिणाम को प्रभावित कर सकती है. ऐसे में उपेंद्र कुशवाहा और BJP का यह कदम चुनावी रणनीति में महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में देखा जा रहा है.