बिहार चुनाव 2025 में सीमांचल क्षेत्र की 24 सीटों ने बड़ा राजनीतिक संदेश दिया है. यहां मुस्लिम वोटरों की भारी संख्या होने के बावजूद महागठबंधन उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सका.
इसका सबसे बड़ा कारण रहा मुस्लिम वोटों का महागठबंधन और असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM के बीच बंट जाना. इस वोट बिखराव का सीधा फायदा एनडीए को मिला और उसने 24 में से 14 सीटें जीत लीं.
AIMIM और महागठबंधन के बीच बंटे मुस्लिम वोट
सीमांचल की चार जिलों पूर्णिया, अररिया, कटिहार और किशनगंज में मुस्लिम आबादी सबसे ज्यादा है. सामान्य तौर पर यह क्षेत्र RJD-कांग्रेस गठबंधन के लिए सबसे मजबूत माना जाता है. लेकिन इस चुनाव में AIMIM ने मुस्लिम वोटों में बड़ी सेंध लगा दी. मुस्लिम वोट पूरे एकजुट होकर महागठबंधन को नहीं मिले और बीजेपी-जेडीयू गठबंधन को फायदा पहुंचा.
AIMIM ने अपने मजबूत प्रदर्शन को दोहराते हुए 5 सीटों पर जीत दर्ज की, जो 2020 के उसके प्रदर्शन के बराबर है.
एनडीए ने हिंदू वोटों में बनाई पकड़
दूसरी ओर एनडीए ने सीमांचल में हिंदू वोटों को बड़े पैमाने पर अपने पक्ष में एकजुट किया. जातीय समीकरणों को साधते हुए बीजेपी, जेडीयू और LJP (राम विलास) ने 14 सीटें जीत लीं.
- बीजेपी: 7 सीट
- जेडीयू: 5 सीट
- एलजेपी (RV): 2 सीट
यह संकेत देता है कि सीमांचल जैसी चुनौतीपूर्ण जनसांख्यिकी वाले क्षेत्र में भी एनडीए सफल हो गया.
महागठबंधन का कमजोर प्रदर्शन
महागठबंधन इस क्षेत्र में बड़ी उम्मीदें रखता था, लेकिन उसे सिर्फ 5 सीटें मिलीं.
- कांग्रेस: 4 सीट
- RJD: 1 सीट
कांग्रेस का राज्यभर में स्ट्राइक रेट कमजोर रहा, लेकिन सीमांचल में उसका प्रदर्शन अपेक्षाकृत बेहतर दिखा. हालांकि यह बढ़त अंतिम नतीजों को बदलने के लिए काफी नहीं थी.
किशनगंज (67.89%), कटिहार (44.47%), अररिया (42.95%) और पूर्णिया (38.46%) जैसे उच्च मुस्लिम आबादी वाले जिलों में भी महागठबंधन को उम्मीद के मुताबिक फायदा नहीं मिला.
AIMIM फिर बनी निर्णायक खिलाड़ी
AIMIM ने बहादुरगंज, कोचाधामन (किशनगंज), अमौर, बैसी (पूर्णिया) और जोकीहाट (अररिया) सीटों पर जीत दर्ज की. जोकीहाट सीट पर RJD चौथे स्थान पर रही, जो महागठबंधन के लिए बड़ा झटका था.
किसका कितना नुकसान और फायदा?
पार्टी 2020 सीटें 2025 सीटेंएनडीए 12 14महागठबंधन 7 5AIMIM 5 5
यानी जहां एनडीए ने अपने प्रदर्शन में सुधार किया, AIMIM ने अपनी पकड़ कायम रखी. लेकिन महागठबंधन, जो सीमांचल को अपना 'कोर' मानता था, वह यहां पिछड़ गया.
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