बिहार विधानसभा चुनाव से पहले राजधानी पटना की परंपरागत कायस्थ बहुल सीटों पर बीजेपी को बड़ा झटका लग सकता है. इस मुख्य कारण कायस्थ समाज की नाराजगी है. कुम्हरार विधानसभा सीट से बीजेपी ने इस बार कायस्थ समुदाय से आने वाले मौजूदा विधायक अरुण सिन्हा का टिकट काटकर वैश्य समाज के विजय कुमार गुप्ता को प्रत्याशी बनाया है. इस फैसले के बाद कायस्थ समाज में गहरा रोष देखने को मिल रहा है.

Continues below advertisement

शनिवार (25 अक्टूबर) को अखिल भारतीय कायस्थ महासभा की बैठक में समाज के नेताओं ने बीजेपी पर कायस्थों की अनदेखी का आरोप लगाया. महासभा ने कहा कि कायस्थ समाज जितना आक्रोशित है, उससे ज्यादा आहत और उपेक्षित महसूस कर रहा है. पार्टी ने कायस्थों को 3 में से केवल 1 सीट दी है, यह हमारे अस्तित्व पर हमला है.

लालू यादव की तर्ज पर चल रही बीजेपी

महासभा के पदाधिकारियों ने कहा कि बीजेपी अब वही कर रही है जो कभी लालू प्रसाद यादव पर आरोप लगते थे. भूरा बाल साफ करो की तरह बीजेपी अब फॉरवर्ड जातियों में से 'ल' (कायस्थ) को साफ करने में लगी है. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अब तय कीजिए, कायस्थों को साफ कौन कर रहा है - लालू या बीजेपी.

Continues below advertisement

कायस्थों की आवाज को बीजेपी ने किया दरकिनार

महासभा के पदाधिकारियों ने कहा कि सभा में यह भी कहा गया कि कायस्थ समाज ने जेपी आंदोलन के समय से कांग्रेस का साथ छोड़कर बीजेपी को समर्थन दिया था, लेकिन आज वही पार्टी कायस्थों की आवाज को दरकिनार कर रही है. महासभा ने कहा कि रवि शंकर प्रसाद, जो 25 साल से सांसद हैं. उन्होंने भी समाज के लिए एक शब्द नहीं बोला है.

कई कायस्थ बहुल सीटों पर बीजेपी को नुकसान की आशंका

पदाधिकारियों ने कहा कि समाज के नेताओं ने कहा कि अगर वरिष्ठ नेता आर.के. सिन्हा स्वस्थ होते, तो बीजेपी ऐसा अन्याय नहीं कर पाती. उन्होंने बीजेपी पर कायस्थ समाज को 'नितिन नवीन' के मंत्री पद से साधने की नाकाम कोशिश करने का आरोप लगाया और कहा कि कायस्थ समाज अब प्रतीकात्मक पदों से नहीं, सम्मानजनक प्रतिनिधित्व चाहता है.

सभा में समाज की उम्मीदें अब आर.के. सिन्हा के पुत्र ऋतुराज सिन्हा से जुड़ी दिखीं. महासभा ने कहा कि उन्हें अपने पिता की तरह कायस्थ समाज की आवाज बनना चाहिए, न कि केवल बीजेपी का चेहरा. समाज ने चेतावनी दी कि अगर पार्टी ने इस उपेक्षा को नहीं सुधारा, तो कायस्थ समाज बीजेपी से दूरी बनाने पर मजबूर होगा. इस नाराजगी के चलते पटना की कई कायस्थ बहुल सीटों पर बीजेपी को नुकसान की आशंका जताई जा रही है.