बिहार विधानसभा चुनाव से पहले सियासी बयानबाजी तेज हो गई है. केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान ने महागठबंधन और राजद पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने कहा कि विपक्ष जानता है कि वह सत्ता में नहीं आने वाला, इसलिए झूठे वादे कर रहा है और जनता को भ्रमित करने की कोशिश कर रहा है.

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चिराग पासवान ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष को खुद पता है कि सत्ता में आना नहीं है, इसलिए बिना सोचे-समझे बड़ी घोषणाएं कर रहे हैं. सवाल यह है कि इन घोषणाओं के लिए पैसा कहां से आएगा. उन्होंने राजद के घोषणा पत्र पर तंज कसते हुए कहा कि हर परिवार को सरकारी नौकरी देने का वादा करना अव्यवहारिक है. उन्होंने कहा कि बिहार का बजट तीन लाख करोड़ है. अगर दो-ढाई करोड़ परिवारों को न्यूनतम वेतन पर नौकरी देनी हो, तो सात से नौ लाख करोड़ की जरूरत पड़ेगी. सवाल यह है कि यह पैसा कहां से आएगा.

एनडीए सरकार की योजनाओं की नकल कर रहा विपक्ष : चिराग पासवान

चिराग पासवान ने कहा कि एनडीए सरकार ने बिहार में 'जीविका दीदी' जैसी योजनाएं शुरू की थीं, जो आज महिलाओं को आत्मनिर्भर बना रही हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि महागठबंधन की पार्टियां उन्हीं योजनाओं की नकल कर रही हैं, जिनकी शुरुआत एनडीए ने की थी. उन्होंने यह भी कहा कि एनडीए सत्ता में आएगा तो हर व्यक्ति को उसकी क्षमता के अनुसार जगह दी जाएगी. उन्होंने कहा कि हम योग्यता और मेहनत के आधार पर अवसर देंगे, न कि परिवारवाद के आधार पर।

यादव मतलब लालू परिवार और मुसलमान सिर्फ वोट बैंक : पासवान

चिराग ने कहा कि आरजेडी की राजनीति सीमित परिवार के इर्द-गिर्द घूमती है. यादव का मतलब आज सिर्फ लालू परिवार रह गया है. मुसलमानों को वे केवल वोट बैंक की तरह देखते हैं. यह बात आज से तय नहीं हुई है यह लालू यादव ने राजनीतिक करियर से लागू है. उन्होंने मुसलमानों को कभी अपना परिवार नहीं माना है बस यादवों को ही अपना परिवार माना है.

हर परिवार में खुशियां और समृद्धि आए- चिराग

चिराग ने आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान आरजेडी समर्थक हिंसा और हुड़दंग कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि हमारे उम्मीदवार की गाड़ी पर हमला हुआ, यह निंदनीय है. उन्होंने बताया कि मदौरा में उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी अंकित का समर्थन किया है.  छठ पूजा को लेकर चिराग पासवान ने कहा कि छठी मैया ने बिना मांगे बहुत कुछ दिया है. मेरी यही कामना है कि हर परिवार में खुशियां और समृद्धि आए. उन्होंने छठ पर्व को लोकतंत्र के 'महापर्व' से जोड़ते हुए कहा कि जब छठ का एक पर्व समाप्त होता है, लोकतंत्र का दूसरा महापर्व यानी चुनाव अपने चरम पर होता है. हम पूरे जोश के साथ प्रचार में उतर रहे हैं और हमें भरोसा है कि परिणाम बिहार और बिहारवासियों के लिए सुखद होंगे.