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बिहार की राजनीति में मकर संक्रांति से ठीक पहले सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है. पटना स्थित कांग्रेस मुख्यालय सदाकत आश्रम में आयोजित 'दही-चूड़ा भोज' ने राज्य में एक नई राजनीतिक हलचल पैदा कर दी है. इस महत्वपूर्ण आयोजन में कांग्रेस के सभी 6 विधायकों की अनुपस्थिति ने इन अटकलों को हवा दे दी है कि क्या पार्टी में कोई बड़ी टूट होने वाली है.

प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम द्वारा आयोजित इस भोज में एक भी विधायक का न पहुंचना चर्चा का विषय बना हुआ है. दिलचस्प बात यह है कि पिछले सप्ताह 'मनरेगा बचाओ आंदोलन' की बैठक में भी 6 में से केवल 3 ही विधायक शामिल हुए थे. ऐसे में राजनीतिक गलियारों में सवाल उठ रहे हैं कि क्या ये विधायक NDA का रुख करने की तैयारी में हैं.

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NDA का तंज- दही सड़ गया, चूड़ा बासी हो गया

बीजेपी प्रवक्ता नीरज कुमार ने इस स्थिति पर चुटकी लेते हुए कहा कि कांग्रेस का दही सड़ चुका है और चूड़ा बासी हो गया है. उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस और राजद के विधायक केवल खरमास खत्म होने का इंतजार कर रहे हैं और जल्द ही एक बड़ी टूट देखने को मिलेगी.

कांग्रेस का बचाव- इलाके में व्यस्त थे विधायक

दूसरी ओर, बिहार कांग्रेस मीडिया विभाग के चेयरमैन राजेश राठौर ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है. उन्होंने तर्क दिया कि विधायकों का न आना उनकी क्षेत्र में व्यस्तता के कारण हो सकता है. उन्होंने बीजेपी पर पलटवार करते हुए कहा कि बीजेपी और जदयू की बैठकों से भी विधायक अक्सर गायब रहते हैं, तो क्या इसका मतलब यह है कि उनकी पार्टियाँ टूट रही हैं?

बिहार में कांग्रेस के कुल 6 विधायक हैं मनोहर प्रसाद सिंह-मनिहारी. सुरेंद्र प्रसाद- वाल्मीकिनगर, आबिदुर रहमान- अररिया, अभिषेक रंजन- चनपटिया, मो0 कमरूल होदा- किशनगंज, मनोज विश्वास- फारबिसगंज

बिहार में मकर संक्रांति का समय अक्सर बड़े राजनीतिक उलटफेर का साक्षी रहा है. अब देखना यह है कि 14 जनवरी के बाद बिहार की राजनीति कौन सा नया मोड़ लेती है.