बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन कर दिया है. माना जा है कि अब से 1महीने 15 दिन बाद राज्य को नए सीएम के साथ नई सरकार मिलेगी. दावा है कि भारतीय जनता पार्टी इस बार अपना मुख्यमंत्री बनाएगी. वहीं दो डिप्टी सीएम होंगे जो जनता दल यूनाइटेड से होंगे. इस बीच जदयू के नेताओं ने अपना विरोध दर्ज कराना शुरू कर दिया है.

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जदयू में उथल-पुथल की स्थिति बनी हुई है और उसके प्रभाव में कमी लगभग तय मानी जा रही है. यह भी अटकलें लगाई जा रही हैं कि नीतीश कुमार के पुत्र निशांत,  जिनके राजनीति में प्रवेश की घोषणा दो दिन पहले हुई थी, भले ही नीतीश कुमार वंशवाद की राजनीति के विरोधी रहे हों, को उपमुख्यमंत्री बनाया जा सकता है.

इन सबके बीच समाचार एजेंसी पीटीआई भाषाके अनुसार जदयू के एक नेता ने हालांकि नाम न बताने की शर्त पर कहा, 'अब हमारे लिए चीजें पहले जैसी नहीं रहने वाली हैं. हमारी पार्टी के सभी मंत्री, चाहे उनमें ‘साहेब’ (नीतीश कुमार) के बेटे ही क्यों न हों, अब अपने राजनीतिक अस्तित्व के लिए बीजेपी की सद्भावना पर निर्भर रहेंगे.'

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नीतीश युग खत्म?

उधर, जदयू कार्यकर्ताओं ने पार्टी की बिहार इकाई के अध्यक्ष उमेश कुशवाहा का घेराव किया. उनकी मांग है कि नीतीश कुमार, राज्यसभा न जाएं और बिहार के सीएम के तौर पर बने रहें.

एक ओर जहां विपक्षी दावा कर रहे हैं कि इस फैसले के साथ नीतीश युग का अंत हो गया है वहीं जदयू प्रवक्ता केसी त्यागी ने कहा कि नीतीश युग का कभी अंत नहीं हो सकता. उन्होंने नया बिहार बनाया है. जैसे कर्पुरी ठाकुर और चौधरी चरण सिंह जिंदा है, ऐसे ही युग-युग तक नीतीश कुमार भी याद किए जाएंगे. जाहिर है कि इससे सदन की भी गरिमा बढ़ेगी, बहस का स्तर ऊंचा होगा और यूं भी ख्याति व अच्छे बौद्धिक ज्ञान के चलते उन्हें सर्वश्रेष्ठ सांसद का पुरस्कार भी मिला था.'