बिहार बीजेपी के एमएलसी देवेश कुमार (Devesh Kumar) ने शुक्रवार (31 जुलाई, 2026) को इस्तीफा दे दिया है. माना जा रहा है कि देवेश कुमार का यह इस्तीफा उपेंद्र कुशवाहा (Upendra Kushwaha) के बेटे दीपक प्रकाश (Deepak Prakash) के मंत्री पद को बचाने के लिए हुआ है. सबसे बड़ा सवाल है कि दीपक प्रकाश के लिए देवेश कुमार का ही इस्तीफा क्यों लिया गया? पढ़ें इनसाइड स्टोरी.
देवेश कुमार मार्च 2021 में राज्यपाल कोटे से एमएलसी मनोनीत हुए थे. 2027 में कार्यकाल पूरा होता लेकिन उससे पहले ही बीजेपी ने उनका इस्तीफा ले लिया. यह इस्तीफा ऐसे वक्त में हुआ है जब बिहार में बांकीपुर का उपचुनाव संपन्न हुआ है. इस्तीफे को इस चुनाव से भी जोड़कर देखा जा रहा है.
…तो इसलिए कुशवाहा को दिया भाव
जेडीयू के एक नेता ने नाम उजागर न करने की शर्त पर बताया कि बांकीपुर उपचुनाव में कुशवाहा वोटर्स बीजेपी के साथ जुड़ा रहा. कुशवाहा कि जितना वोट बैंक है उतना पार्टी के प्रत्याशी को मिला है. सवर्ण में भूमिहार वोटर बीजेपी से दूर रहा. देवेश कुमार भूमिहार जाति से आते हैं. ऐसे में यह एक कड़ी मानी जा रही है कि उपचुनाव में कुशवाहा के वोट बैंक को देखते हुए बीजेपी ने उपेंद्र कुशवाहा को भाव दिया है. बेटे के लिए पार्टी के एमएलसी देवेश कुमार का इस्तीफा ले लिया.
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इस्तीफे को बीजेपी कैसे देख रही है?
देवेश कुमार का ही इस्तीफा क्यों लिया गया यह जानने के लिए बीजेपी से जुड़े नेताओं से संपर्क किया गया. बीजेपी के एक नेता ने ऑफ द रिकॉर्ड बताया कि देवेश कुमार बीजेपी के कई बड़े नेताओं के करीबी रहे हैं. यह वह लॉबी है जो बीजेपी के अंदर गुटबाजी करती है. गुटबाजी एक वजह बनी कि इनका पत्ता साफ कर दिया गया.
बीजेपी नेता ने यह भी दावा किया कि आठ महीने का ही कार्यकाल देवेश कुमार का बचा था और यही वजह है कि चुनावी रुझान और वोटर के मिजाज को देखते हुए पार्टी ने यह बड़ा कदम उठाया है. अब सवाल यह भी उठ रहा है कि आठ महीने बाद दीपक प्रकाश का क्या होगा? क्या बीजेपी ने आठ महीने के लिए ही यह कदम उठया है? अब देखना होगा कि आने वाले समय में और क्या कुछ होता है.
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