बिहार बीजेपी में यूजीसी बिल 2026 को लेकर बगावत शुरू हो गई है. नवादा जिले के हिसुआ विधानसभा से पार्टी के विधायक अनिल सिंह ने खुलकर सामने आए हैं. बिहार में यह पहली बार है जब सत्तारूढ़ पार्टी के एक विधायक ने सत्ता में रहते हुए ही अपनी पार्टी के नेताओं और केंद्र सरकार के फैसले पर सीधा हमला बोला है. सवाल है कि अब बिहार बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी इसे कैसे संभालेंगे?

Continues below advertisement

बुधवार (28 जनवरी, 2026) को विधायक अनिल सिंह ने एबीपी न्यूज़ से बातचीत में साफ कहा कि यूजीसी का यह बिल सामान्य वर्ग, सवर्ण के बच्चों के साथ भेदभाव करता है. उन्होंने आरोप लगाया कि नियम में SC/ST/OBC के लिए शिकायत का स्पष्ट प्रावधान है, लेकिन सामान्य वर्ग के लिए कोई सुरक्षा या अपील का रास्ता नहीं. गलत शिकायत पर कार्रवाई का पुराना प्रावधान हटा दिया गया, जिससे ब्लैकमेलिंग का खतरा बढ़ गया है.

'हमारे साथ भेदभाव हो ये कैसा न्याय'

बीजेपी विधायक ने कहा कि आक्रोश स्वाभाविक है, सरकार को तुरंत संज्ञान लेकर अमेंडमेंट करना चाहिए. उन्होंने साफ कहा कि भेदभाव किसी के साथ नहीं होना चाहिए, लेकिन हमारे साथ भेदभाव हो यह कैसा न्याय? बीजेपी विधायक ने कहा कि सवर्ण समाज बीजेपी का मजबूत वोट बैंक है, लेकिन शिक्षा मंत्री और कमेटी में बीजेपी के सदस्यों ने गंभीरता नहीं दिखाई. 

Continues below advertisement

सड़क पर उतरकर विरोध की चेतावनी

इस पूरे मामले में अनिल सिंह ने चेतावनी देते हुए कहा है कि जरूरत पड़ी तो सड़क पर उतरकर विरोध करेंगे, पीछे नहीं हटेंगे. उन्होंने कहा कि अगर हाई-लेवल कमेटी बनाकर सभी वर्गों को शामिल कर संशोधन नहीं हुआ तो यह जाति के नाम पर विभाजन का बीज बोने जैसा होगा.

अब यह मुद्दा बीजेपी के लिए बड़ी चुनौती बन गया है, क्योंकि सवर्ण समाज पार्टी का कोर वोट बैंक है. सवाल यह है कि क्या यह बगावत बीजेपी में और फूट डालेगी या सरकार संशोधन करेगी? समय बताएगा. यह बयान ऐसे समय में आया है जब पूरे देश में सवर्ण समाज के छात्र और संगठन यूजीसी नियमों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं. 

यह भी पढ़ें- UGC New Rules: 'भूमिहार, ब्राह्मण, राजपूत…', यूजीसी बिल पर सांसद पप्पू यादव का क्लियर कट बयान