दिल्ली में बिहार के बीजेपी अध्यक्ष संजय सरावगी ने एक बयान देकर बिहार की राजनीति को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है. उन्होंने कहा कि जब लालू प्रसाद यादव पहली बार मुख्यमंत्री बने थे. तब उन्हें बीजेपी और आरएसएस का समर्थन मिला था.
जानकारी के अनुसार, बिहार के बीजेपी अध्यक्ष संजय सरावगी के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई है. अब देखा है कि इस बयान पर विपक्ष के नेताओं की क्या प्रतिक्रिया रहती है.
विधायकों की सहमति से ही होता है सीएम का फैसला- संजय सरावगी
आईएएनएस से बातचीत के दौरान संजय सरावगी ने स्पष्ट किया कि उस समय मुख्यमंत्री का चयन विधानमंडल दल के भीतर ही किया गया था. उन्होंने कहा कि चाहे वह बीजेपी का विधानमंडल दल हो या एनडीए का, मुख्यमंत्री का फैसला हमेशा विधायकों की सहमति से ही होता है. उन्होंने यह भी बताया कि उस समय नीतीश कुमार ने प्रस्ताव रखा था, जिसे एनडीए के सभी नेताओं और विधायकों ने सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया था.
सरावगी ने यह भी जोड़ा कि यह पूरी घटना अब अतीत का हिस्सा है और वर्तमान राजनीति इससे अलग दिशा में आगे बढ़ रही है. हालांकि उनके इस बयान को लेकर विपक्षी दलों की ओर से प्रतिक्रिया आने की संभावना है, क्योंकि लालू प्रसाद यादव और बीजेपी के रिश्तों को लेकर यह बयान राजनीतिक रूप से संवेदनशील माना जा रहा है.
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पुराने समीकरण को सामने लाने की हो सकती है कोशिश
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के बयान चुनावी माहौल में पुराने समीकरणों को सामने लाने की कोशिश हो सकते हैं. बिहार की राजनीति में गठबंधन और समर्थन का इतिहास हमेशा से चर्चा का विषय रहा है और ऐसे बयान उस इतिहास को फिर से चर्चा में ला देते हैं. अब देखना होगा कि इस बयान पर अन्य राजनीतिक दल क्या प्रतिक्रिया देते हैं और यह मुद्दा आगे कितना तूल पकड़ता है.
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