भोजपुर के भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में बिहार पुलिस की कार्यशैली पर उठ रहे सवालों के बीच पूर्व DGP अभयानंद ने प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने एसडीएम की मौजूदगी पर सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने कहा कि ये मेरी समझ से परे है कि एसडीएम वहां पर क्या कर रहे थे?
बिहार के पूर्व DGP अभयानंद ने कहा, "मेरे दिमाग जो बात आ रही है, उसमें सबसे महत्वपूर्ण बात है कि पुलिस की कार्रवाई दो तरीके की होती है. एक होती है जिसमें भीड़ हो, मजमा हो, लॉ एंड ऑर्डर की स्थिति हो, वहां पर मजिस्ट्रेट और पुलिस दोनों की तैनाती होती है. इस केस में मैं देख रहा हूं कि एसडीएम का भी नाम आ रहा है कि वो भी वहां पर थे. ये मेरी समझ में नहीं आता है कि एसडीएम वहां पर क्या कर रहे थे? क्योंकि ये मजमा वाली समस्या नहीं थी.''
इस तरह की कार्रवाई में SDM का कोई संबंध नहीं होता- अभयानंद
उन्होंने आगे कहा, ''किसी व्यक्ति को पकड़ने के लिए पुलिस गई थी तो ये पूरी तरह से क्राइम से संबंधित मामला था. एसडीएम या मजिस्ट्रेट वहां कर क्या रहे थे? इस तरह की कार्रवाई में SDM का कोई संबंध नहीं होता है. अगर डीएम को होता है तो उनके ऑफिस तक सीमित होता है. हमने अपने तजुर्बे में तो नहीं देखा है कि क्राइम के मामले में रेड में डीएम कभी पुलिस के साथ में गए हों. लॉ एंड ऑर्डर की स्थिति वाले मामले में डीएम को कभी-कभी रहना पड़ता है. ये एक इश्यू है जो मेरे दिमाग में परेशानी पैदा कर रहा है.''
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मृतक के भाई के आरोपों का भोजपुर पुलिस ने किया खंडन
उधर, भोजपुर पुलिस ने भरत तिवारी मामले में एसपी पर मृतक के भाई चंदन तिवारी को डराने-धमकाने के लगाए गए आरोपों को पूरी तरह निराधार और तथ्यहीन बताया है. पुलिस ने सोशल मीडिया और अन्य संचार माध्यमों पर प्रसारित खबरों का खंडन करते हुए कहा कि मामले को लेकर भ्रामक जानकारी फैलाई जा रही है.
भरत तिवारी एनकाउंटर मामले की न्यायिक जांच जारी
आरोप है कि 17 जून 2026 की सुबह, पुलिस ने भरत तिवारी के घर को घेर लिया था और जब भरत घर से बाहर आकर पुलिस से बात करने लगे, तो कुछ आश्वासन मिलने पर उन्होंने अपनी पिस्तौल फेंक दी थी. इसके बावजूद, पुलिस उसे कई गोलियां मारी इसके बाद जब उन्हें बेहतर इलाज के लिए पटना ले जाया गया था, जहां उसकी मौत हो गई. बता दें कि बिलौटी गांव में पुलिस के कथित एनकाउंटर में मारे गए भरत तिवारी मामले की न्यायिक जांच की जा रही है.
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