भरत तिवारी के केस पर रोहिणी आचार्य ने पोस्टमार्टम की रिपोर्ट को लेकर सवाल उठाया है. बुधवार (24 जून, 2026) को रोहिणी आचार्य ने एक्स पर पोस्ट करते हुए पूछा है कि भरत तिवारी की पोस्टमार्टम रिपोर्ट अब तक क्यूं नहीं सार्वजनिक की गई?

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रोहिणी आचार्य ने कहा कि भरत तिवारी फर्जी मुठभेड़ मामले में सरकार के न्यायिक जांच से त्वरित कुछ स्पष्ट व उजागर नहीं होने वाला है. न्यायिक जांच की प्रक्रिया लंबी चलने की संभावना है. इस वजह से इस जघन्य हत्याकांड के दोषियों का दोष साबित होने में काफी वक्त भी लगने वाला है. मेरी राय में न्यायिक जांच का ये आदेश जनाक्रोश को ठंडा करने की सरकार की एक कवायद का हिस्सा है.

उन्होंने कहा, "दलितों, वंचितों, शोषितों, पिछड़ों, हाशिए पर खड़ी आबादी के अधिकारों, उनकी सहूलियतों, उनकी समस्याओं के निवारण एवं समाधान  के लिए संघर्ष करते हुए अपनी जान गंवाने वाले भरत तिवारी के परिजनों को न्याय दिलाने के लिए जमीन पर गंभीरता से संघर्ष कर रहे. आवाज उठा रहे लोगों के साथ-साथ सरकार से मेरा भी ये सीधा सवाल है कि भरत तिवारी की पोस्टमार्टम रिपोर्ट कहां है? क्यूं अब तक सार्वजनिक नहीं की गई है पोस्टमार्टम रिपोर्ट?"

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'किसे बचाना चाह रही सम्राट सरकार…'

रोहिणी आचार्य ने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट को सार्वजनिक करने में की जा रही देरी की आड़ में सम्राट सरकार और पुलिस किसे बचाना चाह रही? मामले से जुड़ी कई याचिकाएं कई न्यायालयों/अदालतों में दायर की गई हैं. याचिकाओं की कानूनी मजबूती के लिए पोस्टमार्टम रिपोर्ट का होना निहायत ही जरूरी है.

रोहिणी ने आगे और भी सवाल उठाए. उनका कहना है कि परिजन भरत तिवारी के मोबाइल फोन के डिटेल्स को भी सार्वजनिक किए जाने की मांग कर रहे हैं, मोबाइल पुलिस के कब्जे में है, लेकिन इस बारे में सम्राट सरकार की पुलिस ने चुप्पी साध रखी है. परिजनों का स्पष्ट कहना है कि मोबाइल फोन में फर्जी मुठभेड़ का आदेश देने वाले असली व बड़े गुनाहगारों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य व जानकारियां हैं. कहीं ऐसा तो नहीं कि अपनी काली करतूत पर पर्दा डालने के मकसद से पुलिस ने मोबाइल फोन, उसमें मौजूद डेटा और व्हाट्सएप चैट को नष्ट कर दिया है?

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