जन सुराज (Jan Suraaj) के सूत्रधार प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) ने पहली बार चुनाव लड़कर ना सिर्फ जीत दर्ज की बल्कि बीजेपी के गढ़ बांकीपुर को ऐसा हिलाया है कि देशभर में एक अलग संदेश गया है. बांकीपुर में 32 राउंड में गिनती हुई और प्रशांत किशोर शुरू से ही आगे रहे. 32 राउंड के बाद 19,324 वोटों के अंतर से उन्होंने बीजेपी के प्रत्याशी नीरज सिन्हा (Neeraj Sinha) को हरा दिया. आरजेडी की रेखा गुप्ता (Rekha Gupta) तीसरे नंबर पर रहीं. सबसे बड़ा सवाल है कि बीजेपी के इलाके में प्रशांत किशोर ने कैसे झंडा लहराया? 

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पहले जानें किसे कितना वोट मिला

  • प्रशांत किशोर (जन सुराज पार्टी)- 64,151
  • नीरज सिन्हा (भारतीय जनता पार्टी)- 44,827
  • रेखा गुप्ता (राष्ट्रीय जनता दल)- 14,273

प्रशांत किशोर की जीत की वजह जानें

1) बांकीपुर बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की सीट थी. राज्यसभा जाने के लिए जब उन्होंने इस्तीफा दिया तो शुरू से ही प्रशांत किशोर बांकीपुर क्षेत्र में जनसंपर्क करने में जुट गए. लोगों के बीच रहना, वोटरों से मिलना, लोगों को उनके अधिकार के लिए जागरूक करना, इन सब मुद्दों पर उन्होंने काम किया. खासकर युवाओं को वर्तमान मुद्दे से अवगत कराने पर ज्यादा जोर दिया जो इस जीत के लिए एक बड़ी वजह है.

2) प्रशांत किशोर युवा वोटरों को खासकर अपने पाले में करने में कामयाब रहे. माना जा रहा है कि नीट मामला का आंदोलन भी प्रशांत किशोर के लिए फायदेमंद रहा. जो बीजेपी के वोटर थे उनमें 40 वर्ष से ऊपर के लोगों ने बीजेपी का साथ दिया, लेकिन युवाओं ने प्रशांत किशोर को पसंद किया है. जो जानकारी मिली है उसके अनुसार अधिसंख्य घरों में ऐसी स्थिति देखने को मिली कि एक ही परिवार में जो युवा हैं उन्होंने प्रशांत किशोर को पसंद किया तो बुजुर्ग और अन्य वर्ग के लोगों ने बीजेपी को पसंद किया.

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3) एक बड़े कारण बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी भी हैं. नीतीश कुमार के बाद बीजेपी ने सम्राट को तो सीएम बना दिया लेकिन बहुत लोग खुश नहीं हैं. जानकारी के मुताबिक युवा वर्ग सम्राट चौधरी से नाखुश है. जातीय समीकरण के हिसाब से भूमिहार, कुर्मी या अन्य जातियों के लोग भी सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने से पहले से नाराज थे. यह भी एक वजह है कि इसका असर इस उपचुनाव में दिखा है. नीतीश कुमार के हटने से कुर्मी वोटरों की नाराजगी दिखी है. करीब 50% कुर्मी वोट प्रशांत किशोर के खाते में जाने की बात सामने आ रही है. 

4) 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव के मुकाबले इस उपचुनाव में करीब 7% कम वोटिंग हुई है. हालांकि युवाओं का वोटिंग प्रतिशत अधिक रहा तो बीच के उम्र वाले और बुजुर्ग वर्गों का मतदान प्रतिशत कम रहा. इससे भी प्रशांत किशोर को फायदा हुआ है.

5) प्रशांत किशोर को हर वर्ग का वोट मिला है. सबसे बड़ी बात है कि उन्होंने एनडीए के वोटरों में सेंधमारी की है. दूसरी ओर आरजेडी के जो कोर मुस्लिम वोटर्स हैं उनमें भी टूट हुई है. मुस्लिम वर्ग से 65 से 70% वोट प्रशांत किशोर के खाते में जाने की चर्चा है. प्रशांत किशोर को यादवों का भी समर्थन मिला है. यादव में करीब 30% युवा वर्ग के लोगों ने प्रशांत किशोर को समर्थन दिया है.

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