3 अगस्त 2026 को बिहार की बांकीपुर सीट पर उपचुनाव के नतीजों ने सबको हिला दिया. 31 राउंड में 27 पूरे होने के बाद जन सुराज पार्टी के प्रशांत किशोर 55,780 वोटों के साथ जीत की ओर बढ़ रहे हैं. यूं भी कह सकते हैं कि वह जीत ही गए. दूसरे नंबर पर बीजेपी के नीरज कुमार (38,893 वोट) हैं. बांकीपुर सीट बीजेपी का अभेद्य किला थी, जहां 30 साल से कमल खिलता था. अब पीके ने उस कमल को उखाड़ फेंका. इसके बावजूद यह जीत बीजेपी से ज्यादा तेजस्वी यादव के लिए गले की फांस बन गई है. आइए जानते हैं कैसे...

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राजनीतिक विश्लेषक इसकी 5 बड़ी वजहें बताते हैं...

पहली वजह: RJD का 2025 में लगभग 'सफाया'

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बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में RJD को सबसे बड़ा झटका लगा था. NDA ने 243 में से 202 सीटें जीतीं, जबकि RJD और उसके सहयोगियों का महागठबंधन महज 35 सीटों पर सिमट गया. RJD ने 143 सीटों पर चुनाव लड़ा और सिर्फ 25 सीटें ही जीत पाई.

हालांकि, RJD को 23% वोट शेयर मिला, जो बीजेपी और JDU दोनों से ज्यादा था, लेकिन वोटों को सीटों में बदलने का गणित RJD के खिलाफ काम कर गया. 1.13 करोड़ वोटों के बावजूद RJD को सिर्फ 27 सीटें मिलीं. यानी, RJD का वोट बैंक तो है, लेकिन वह चुनाव जीतने के लिए काफी नहीं है.

तेजस्वी यादव नेता प्रतिपक्ष तो बन गए, लेकिन उनकी पार्टी इतनी कमजोर हो गई कि विपक्ष का नेतृत्व करना भी मुश्किल हो गया.

दूसरी वजह: तेजस्वी की 'गायबगी' जब विपक्ष का नेता ही न दिखे

बांकीपुर उपचुनाव के दौरान तेजस्वी यादव की गैर मौजूदगी ने उनकी छवि को बड़ा नुकसान पहुंचाया. वे विदेश में थे और RJD प्रत्याशी रेखा गुप्ता के लिए प्रचार नहीं कर पाए. NDA ने इस मौके पर तेजस्वी पर 'जिम्मेदारियों से भागने' का आरोप लगाया.

मीडिया रिपोर्ट्स में उन्हें 'लापता तेजस्वी' कहकर पुकारा, जबकि प्रशांत किशोर पूरी ताकत से मैदान में थे. तेजस्वी न तो प्रचार में दिखे और न ही चुनावी माहौल को अपने पक्ष में कर पाए.

तीसरी वजह: RJD की बांकीपुर में 'दयनीय' स्थिति

बांकीपुर में RJD प्रत्याशी रेखा गुप्ता तीसरे स्थान पर थीं. 2025 में भी वह 50,000 से ज्यादा वोटों से हारी थीं. आंकड़े बताते हैं कि बांकीपुर में RJD कभी मजबूत नहीं रही. जब प्रशांत किशोर ने इस सीट पर कब्जा किया, तो उन्होंने RJD के वोटों का एक बड़ा हिस्सा खींच लिया. RJD के पास न तो इस सीट पर अपनी मजबूत पकड़ है, न ही तेजस्वी के पास वहां जनाधार है.

चौथी वजह: 'साइलेंट पैक्ट' का आरोप और महागठबंधन में दरार

बीजेपी ने आरोप लगाया कि प्रशांत किशोर और RJD के बीच 'साइलेंट पैक्ट' है. चाहे यह सच हो या नहीं, इस आरोप ने RJD की छवि को नुकसान पहुंचाया. कांग्रेस ने भी RJD पर सवाल उठाए कि कहीं तेजस्वी ने बीजेपी से कोई डील तो नहीं कर ली.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, महागठबंधन के सहयोगियों को बांकीपुर उपचुनाव में शामिल नहीं किया गया. इससे महागठबंधन में फूट साफ नजर आई. जब आपके अपने सहयोगी आप पर भरोसा न करें, तो विपक्ष का नेतृत्व करना और मुश्किल हो जाता है.

पांचवीं वजह: जब 'गैर-राजनीतिक' चेहरा बनता गया 'विपक्ष का नया चेहरा'

प्रशांत किशोर ने बीजेपी के गढ़ में घुसकर करीब 50% वोट हासिल किए. इससे वे 'विपक्ष का नया चेहरा' बनने के करीब हैं. जब RJD का नेता विदेश में है और उसकी प्रत्याशी तीसरे नंबर पर है, तो जनता के सामने 'बदलाव' का चेहरा प्रशांत किशोर बनकर उभरते हैं.

बांकीपुर में 37% 'अपर कास्ट' वोटर हैं, जो पारंपरिक रूप से बीजेपी को वोट देते थे. इस बार उन्होंने प्रशांत किशोर की तरफ रुख किया. RJD को ये वोट कभी नहीं मिलते, लेकिन एक ब्राह्मण चेहरा यानी प्रशांत किशोर उन्हें आकर्षित करने में कामयाब रहे.

छठी वजह: 'बदलाव' के नैरेटिव से RJD की जातिगत राजनीति खत्म?

प्रशांत किशोर ने इस चुनाव को जातिगत राजनीति के खिलाफ जनमत संग्रह बनाया. RJD की पहचान यादव-मुस्लिम वोट बैंक से है, लेकिन बांकीपुर की जीत ने दिखा दिया कि जाति से ऊपर उठकर वोट करने वाले वोटर भी हैं.

2025 के चुनाव में RJD को 23% वोट शेयर मिला, लेकिन वह सीटों में नहीं बदल पाया. बांकीपुर के नतीजे ने साबित कर दिया कि तेजस्वी की पुरानी जातिगत राजनीति अब काम नहीं कर रही. जनता 'बदलाव' चाहती है और प्रशांत किशोर उस बदलाव का चेहरा बन रहे हैं.

तो क्या यह तेजस्वी के लिए 'वेक-अप कॉल' है?

एक्सपर्ट्स कहते हैं कि बांकीपुर का नतीजा बीजेपी के लिए झटका है, लेकिन तेजस्वी यादव और RJD के लिए यह 'वेक-अप कॉल' है:

  • RJD की सीटें 25 पर सिमट चुकी हैं, यानी विपक्ष का नेतृत्व करने लायक भी नहीं हैं.
  • चुनाव प्रचार के समय तेजस्वी विदेश में थे, जबकि उनकी प्रत्याशी को हार का सामना करना पड़ा.
  • इस चूक से प्रशांत किशोर 'विपक्ष का नया चेहरा' बनकर उभरे हैं.
  • कांग्रेस भी उंगली उठा रही है, यानी महागठबंधन में फूट साफ दिख रही है.

रशीद किदवई कहते हैं, 'एक उपचुनाव से कोई बड़ा ट्रेंड नहीं बनता, लेकिन बांकीपुर ने साफ कर दिया कि अपर कास्ट वोटर अब बीजेपी के अलावा किसी और की तरफ देख रहे हैं. हालांकि वह RJD नहीं है.'

प्रशांत किशोर ने उस जगह को भर दिया है, जहां RJD कभी पहुंच नहीं पाई. तेजस्वी को अब विपक्ष का सच्चा नेता साबित करना होगा, वरना RJD का वोट बैंक धीरे-धीरे PK की तरफ शिफ्ट होता रहेगा. बांकीपुर की जीत ने 2027 के बिहार चुनाव के लिए नए समीकरण बना दिए हैं. इन समीकरणों में तेजस्वी यादव कहां खड़े हैं, यह सबसे बड़ा सवाल है.