बांकीपुर सीट (Bankipur Seat) पर उपचुनाव दिलचस्प तो होने ही वाला था, अब बीजेपी ने अपना प्रत्याशी बदलकर इसे और भी दिलचस्प बना दिया है. शुक्रवार (10 जुलाई, 2026) को पहले प्रत्याशी अभिषेक कुमार सिन्हा (Abhishek Kumar Sinha) ने अपना नामांकन वापस लिया तो नए कैंडिडेट के रूप में पार्टी की ओर से नीरज कुमार सिन्हा (Neeraj Kumar Sinha) के नाम की घोषणा हुई. सवाल है कि इस तरह से एक प्रत्याशी का पीछे हटना और फिर नए का ऐलान करना, इससे प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) को फायदा होगा या नुकसान?

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'बैकफुट पर जरूर चली गई बीजेपी'

बिहार के वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक जानकार धीरेंद्र कुमार ने कहा कि प्रशांत किशोर न जीत रहे थे ना जीतेंगे. मौजूदा स्थिति में बीजेपी कैंडिडेट बदलने के कारण बैकफुट पर जरूर चली गई है. हालांकि प्रशांत किशोर इन परिस्थितियों में जीत जाएंगे यह कहना उचित नहीं है. 

'प्रशांत किशोर और आरजेडी की लड़ाई यहां बीजेपी से'

इसका कारण बताते हुए धीरेंद्र कुमार ने कहा कि बांकीपुर सीट कायस्थों का गढ़ है. कायस्थ बहुल क्षेत्र है तो कायस्थ के बच्चे-बच्चे एड़ी छोटी एक कर देंगे. अभिषेक सिन्हा हों या नीरज सिन्हा, दोनों मजबूत उम्मीदवार नहीं दोनों एक जमीनी कार्यकर्ता रहे हैं. प्रशांत किशोर और आरजेडी की लड़ाई यहां बीजेपी से है, उम्मीदवार से नहीं है.

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'प्रशांत की छवि में दाग लग गई'

आगे धीरेंद्र कुमार कहते हैं कि प्रशांत किशोर की भी छवि कोई स्थिर नहीं है. जो छवि उन्होंने बनाई वह अब मजबूत नहीं है. इसका कारण पीके का घमंड है. छोटे चैनल से बात न करना, मुसलमान के बीच वह जवाब नहीं जुटा पा रहे, प्रशांत की छवि में दाग लग गई है.

'पीके के उदय का मतलब तेजस्वी का अस्त'

एक और कारण बताते हुए उन्होंने कहा, "प्रशांत किशोर के उदय होने का मतलब यह भी है कि तेजस्वी यादव का पॉलिटिकल अस्त होना. ऐसे में आरजेडी अपने वोटों को ट्रांसफर नहीं होने देगी. अभिषेक सिन्हा की जो छवि सामाजिक तौर पर रही है और क्योंकि उनकी पत्नी ही उनका विरोध कर रही थी, ऐसे में बीजेपी के लिए अभिषेक का चुनाव लड़ना नुकसानदेह होता.

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