बिहार विद्यालय परीक्षा समिति की मैट्रिक परीक्षा कड़ी सुरक्षा के बीच मंगलवार (17 फरवरी) से शुरू हो गई. इंटरमीडिएट परीक्षा के शांतिपूर्ण समापन के बाद अब मैट्रिक के परीक्षार्थी मैदान में हैं. इस बीच बांका जिले के रजौन प्रखंड स्थित एक परीक्षा केंद्र पर पहले ही दिन दो ऐसी तस्वीरें सामने आईं, जो सिस्टम की लापरवाही और छात्रों के जज्बे की अलग-अलग कहानी बयां करती हैं. मामला रजौन के राष्ट्रीय उच्च माध्यमिक विद्यालय धौनी केंद्र का है. जहां एक तरफ फॉर्म भरने में हुई गलती के कारण छात्रा को लड़कों के बीच बैठकर परीक्षा देनी पड़ी, तो वहीं दूसरी तरफ एक छात्र ऑपरेशन के तुरंत बाद टांकों के दर्द के बावजूद अपने भविष्य को संवारने के लिए परीक्षा केंद्र पहुंचा.

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सैकड़ों छात्रों के बीच अकेली छात्रा स्वाति

इस परीक्षा केंद्र पर जिले के कटोरिया प्रखंड की छात्रा स्वाति यादव जब परीक्षा देने पहुंची, तो वहां का नजारा देखकर असहज हो गईं. पूरा केंद्र छात्रों (लड़कों) के लिए निर्धारित था, लेकिन स्वाति का एडमिट कार्ड इसी केंद्र के लिए जारी हुआ था.

दरअसल परीक्षा फॉर्म भरते समय एक बड़ी चूक हुई थी. जेंडर (Gender) कॉलम में 'फीमेल' (Female) की जगह गलती से 'मेल' (Male) अंकित हो गया था. इस एक गलती के कारण उनका सेंटर छात्राओं के बजाय छात्रों वाले केंद्र पर पड़ गया. मजबूरन स्वाति को सैकड़ों लड़कों के बीच बैठकर परीक्षा देनी पड़ी.

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पहली पाली में भी आया ऐसा मामला- केंद्राधीक्षक

राष्ट्रीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, धौनी के केंद्राधीक्षक राकेश रंजन ने पुष्टि करते हुए बताया कि छात्रा स्वाति यादव ने द्वितीय पाली में परीक्षा दी है. हैरानी की बात यह है कि सिर्फ स्वाति ही नहीं, बल्कि प्रथम पाली में भी ठीक इसी तरह की गलती (जेंडर एरर) के कारण एक और छात्रा को इसी केंद्र पर लड़कों के बीच परीक्षा देनी पड़ी.

दो ऑपरेशन के बाद परीक्षा देने पहुंचा हितेश

इसी केंद्र पर शिक्षा के प्रति समर्पण की एक भावुक कर देने वाली तस्वीर भी दिखी. अमरपुर प्रखंड के उत्क्रमित उच्च विद्यालय, मौहता-भीखनपुर का छात्र हितेश कुमार पांडेय (पिता- मिथुन पांडेय) गंभीर सर्जरी के बावजूद परीक्षा देने पहुंचा.

टांकों के साथ परीक्षा देने पहुंचे छात्र ने क्या बताया?

हितेश ने बताया कि पेट में गंभीर समस्या के कारण 28 जनवरी को उनका पहला ऑपरेशन हुआ था. इसके बाद परीक्षा से महज दो दिन पहले रविवार (15 फरवरी) को उनका दूसरा बड़ा ऑपरेशन हुआ है. डॉक्टरों ने अगस्त में तीसरे ऑपरेशन की बात कही है. पेट में ताजा टांके और असहनीय दर्द होने के बावजूद हितेश ने हिम्मत नहीं हारी और अपने पिता के साथ केंद्र पर पहुंचकर परीक्षा दी.