बिहार के बांका में डिजिटल इंडिया के इस दौर में साइबर अपराधियों ने ठगी का एक ऐसा तरीका निकाला है, जिसमें न तो किसी स्मार्टफोन की जरूरत है और न ही किसी ओटीपी की. रजौन प्रखंड के तिलकपुर निवासी मनोज कुमार सिंह और उनकी पत्नी पूनम देवी के साथ हुई ₹75,500 की ठगी ने सुरक्षा तंत्र पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

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​बैंक राशि निकालते वक्त हुआ ठगी का खुलासा

​पीड़ित दंपति के पास मात्र एक साधारण कीपैड फोन है. उन्हें इस ठगी की भनक तब लगी जब वे 6 मई 2026 को कुछ राशि निकालने के लिए बैंक पहुंचे थे, खाते की जांच करने पर पता चला कि अप्रैल माह में ही उनके मेहनत की कमाई पर सेंध लग चुकी थी. बैंक स्टेटमेंट में उन्होंने पाया कि 10 अप्रैल से 15 अप्रैल के बीच मनोज के खाते से 25,500 रुपये और उनकी पत्नी पूनम देवी के खाते से 50,000 रुपये की अवैध निकासी की जा चुकी थी. मामले की गंभीरता को देखते हुए दंपति ने बीते गुरुवार को बांका साइबर थाना में ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई है.

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दूसरे राज्य से 'बायोमेट्रिक' के जरिए निकासी 

​पूछने पर बैंक कर्मियों ने बताया कि यह राशि संभवतः किसी दूसरे राज्य में बायोमेट्रिक (Aadhar Enabled Payment System - AePS) के माध्यम से निकाली गई है. इसमें ठग बिना बैंक गए या बिना डेबिट कार्ड के केवल आधार डेटा और क्लोन किए गए फिंगरप्रिंट का उपयोग करके पैसे निकाल लेते हैं.

छानबीन में जुटी साइबर पुलिस

पीड़ित मनोज कुमार सिंह ने बताया कि यह राशि उनके परिवार के भरण-पोषण का एकमात्र सहारा थी, जिसके चले जाने से अब उनके सामने बड़ा आर्थिक संकट खड़ा हो गया है. फिलहाल, साइबर थाना पुलिस ट्रांजेक्शन हिस्ट्री और लोकेशन के आधार पर मामले की छानबीन कर रही है.

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