बिहार सरकार के कैबिनेट मंत्री डॉ. अशोक चौधरी के पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय में राजनीति विज्ञान विषय में सहायक प्राध्यापक के रूप में सेवा योगदान देने पर सियासत शुरू हो गई है. सोमवार (16 फरवरी, 2026) को जैसे ही अशोक चौधरी ने अपने एक्स हैंडल से इसकी जानकारी दी कि उन्हें अब नई जिम्मेदारी मिली है तो कांग्रेस ने नीतीश सरकार को घेरते हुए हमला बोला.
बिहार कांग्रेस के प्रवक्ता डॉ. स्नेहाशीष वर्धन पांडेय ने तंज कसते हुए कहा कि बिहार के पीएचडी धारक नौकरियों के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं और राज्य की सरकार में सत्तारूढ़ दल के कैबिनेट मंत्री एमएलसी डॉ. अशोक चौधरी सहायक प्राध्यापक बन रहे हैं.
'सार्वजनिक नहीं की जाती नियुक्तियों की सूचना'
स्नेहाशीष वर्धन ने आगे कहा कि एक ओर जहां बिहार में स्थापित विश्वविद्यालयों में नियुक्ति प्रक्रिया लंबे समय से धीमी गति में संचालित है वहीं दूसरी ओर लगातार नियुक्ति प्रक्रिया पर सवालिया निशान लग रहे हैं. कई उपयोगी विषयों में नियुक्तियों की कोई सूचना तक सार्वजनिक नहीं की जाती. ऐसे में बिहार के पीएचडी धारक नौकरियों की तलाश में दूसरे प्रदेशों में निजी संस्थानों में नौकरी करने को विवश हैं, वहीं बिहार की बहाली में दूसरे प्रदेशों के लोगों ने नियुक्तियों में बाजी मार ली.
कांग्रेस नेता ने कहा कि बिहार का बेरोजगार पीएचडी धारक नौकरियों की तलाश में दर-दर भटक रहा है और सूबे के मंत्री किसी जरूरतमंद पीएचडी धारक की एक सीट हजम कर लेते हैं. विश्वविद्यालयों में रिक्तियों के अनुरूप बहाली नहीं हो रही है और जो बहाली हो भी रही है उसमें ऐसे राजनीतिक व्यक्ति जो संभवतः एक दिन भी कक्षाएं ना लें और ना ही विश्वविद्यालय के उन्नयन और सेवा कार्य में ही सहयोग देंगे उन्हें नियुक्ति दी जा रही है.
अशोक चौधरी पर निशाना साधते हुए कहा कि एक मेधावी विद्यार्थी के लिए उन्हें यह पद त्याग देना चाहिए था, लेकिन उन्होंने व्यक्तिगत स्वार्थ में इसे नजरअंदाज कर दिया.
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