भारतीय टेनिस के लिए विंबलडन से अच्छी खबर आई है. 18 साल के अर्नव पापरकर ने जूनियर बॉयज सिंगल्स के क्वार्टर फाइनल में पहुंचकर बड़ा इतिहास रच दिया है. वह 36 साल बाद इस दौर तक पहुंचने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बने हैं. इससे पहले 1990 में लिएंडर पेस ने यह उपलब्धि हासिल की थी. उसी साल लिएंडर पेस ने जूनियर विंबलडन का खिताब भी अपने नाम किया था. अर्नव ने प्री-क्वार्टर फाइनल में जापान के रियो तबाता को 52 मिनट में 6-2, 6-1 से हराया. इस जीत के साथ उन्होंने अंतिम-8 में अपनी जगह पक्की कर ली. वह अब लिएंडर पेस, रमणाथन कृष्णन और रमेश कृष्णन जैसे दिग्गज भारतीय खिलाड़ियों की सूची में शामिल हो गए हैं. इसके अलावा 2009 यूएस ओपन में युकी भांबरी के बाद किसी जूनियर ग्रैंड स्लैम के क्वार्टर फाइनल में पहुंचने वाले पहले भारतीय भी बन गए हैं.

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पुणे से विंबलडन तक का सफर

अर्नव पापरकर महाराष्ट्र के पुणे के रहने वाले हैं और उनकी उम्र 18 साल है. वह इस समय आईटीएफ जूनियर रैंकिंग में 19वें स्थान पर हैं. करीब छह फीट लंबे अर्नव पुणे की हेमंत बेंद्रे टेनिस अकादमी में कोच प्रोसनजीत पॉल से प्रशिक्षण लेते हैं. इसके साथ ही वह स्पेन की सोटो अकादमी में कोच निगेल बीवर्स की देखरेख में भी अभ्यास करते हैं.

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अर्नव को महाराष्ट्र स्टेट लॉन टेनिस एसोसिएशन (MSLTA), महाटेनिस फाउंडेशन, महाराष्ट्र सरकार की मिशन लक्ष्यवेध योजना और कॉर्पोरेट प्रायोजक आर्यन पंप्स का सहयोग मिल रहा है. साल 2023 में उन्होंने ऑस्ट्रेलियन ओपन अंडर-14 एशिया-पैसिफिक एलीट ट्रॉफी जीतकर पहचान बनाई. इसी साल कोल्हापुर में वाइल्ड कार्ड एंट्री मिलने के बाद उन्होंने अंडर-16 राष्ट्रीय चैंपियन का खिताब भी जीता.

साल 2024 में 16वें जन्मदिन पर उन्हें एटीपी चैलेंजर टूर्नामेंट में वाइल्ड कार्ड मिला और उन्होंने प्रोफेशनल टेनिस में कदम रखा. इसके बाद 2025 में बहरीन के आईटीएफ J60 मनामा और मलेशिया के J200 कुआलालंपुर टूर्नामेंट जीतकर उन्होंने अपनी प्रतिभा साबित की. इस साल वह AITA अंडर-18 राष्ट्रीय रैंकिंग में लगातार 21 सप्ताह तक नंबर-1 रहे. वहीं रोलां गैरो जूनियर चैंपियनशिप 2026 में तीसरे दौर तक पहुंचने के बाद उनकी विश्व जूनियर रैंकिंग टॉप-20 में पहुंच गई.

शानदार प्रदर्शन और पुरानी हार का हिसाब बराबर

विंबलडन के दूसरे दौर में अर्नव ने जूनियर विश्व नंबर-3 अमेरिका के कीटन हैंस को 6-2, 6-3 से हराकर बड़ा उलटफेर किया. इस मैच में उन्होंने छह ऐस लगाए. उन्होंने एक भी ब्रेक प्वाइंट नहीं गंवाया और अपनी सर्विस पर सिर्फ 18 अंक खोए. इसके बाद रियो तबाता के खिलाफ भी उन्होंने शानदार खेल दिखाया. इस मुकाबले में अर्नव ने आठ ऐस लगाए और पहली सर्विस पर 25 में से 23 अंक अपने नाम किए. उनकी सबसे तेज सर्विस 208 किमी प्रति घंटा रही. रियो तबाता के खिलाफ मिली यह जीत उनके लिए खास रही क्योंकि इससे पहले वह उनसे दो बार हार चुके थे. एक मुकाबले में वह निर्णायक सेट में 5-2 की बढ़त के बाद भी जीत नहीं सके थे.

मैच के बाद अर्नव ने कहा, 'वह मुकाबला मेरे दिमाग में था. मैंने खुद से कहा कि अब मैं उस तरह दोबारा नहीं हारूंगा. अब मैं मानसिक रूप से पहले से ज्यादा मजबूत और शांत हूं. मैं खुद को यही समझाता हूं कि यह सिर्फ एक टेनिस मैच है.' उन्होंने कहा कि उन्हें लगा तबाता अपनी सर्विस के दौरान संघर्ष कर रहे थे, लेकिन उन्होंने अपना पूरा ध्यान सिर्फ अपने खेल पर रखा क्योंकि मैच में कभी भी स्थिति बदल सकती है.

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अर्नव ने अपनी बेहतर सर्विस का श्रेय कोच हेमंत बेंद्रे को दिया. उन्होंने कहा, 'अगर आप अब मेरी सर्विस देखेंगे तो मेरा स्विंग पहले से धीमा और ज्यादा संतुलित है. मेरे कोच ने अप्रैल में कहा था कि अभी इस पर काम करना बेहतर रहेगा, इससे चोट का खतरा भी कम होगा. इससे मेरी लय और निरंतरता दोनों में सुधार आया है.'

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