इस समय विश्व क्रिकेट में अगर किसी युवा खिलाड़ी की चर्चा सबसे तेज हो रही है वह कोई और नहीं वैभव सूर्यवंशी हैं. वही भारत से लेकर इंग्लैंड तक के  क्रिकेट विशेषज्ञ और कमेंटेटर वैभव के खेल की तारीफ कर रहे हैं. हर कोई उन्हें एक असाधारण प्रतिभा मान रहा है. हालांकि, उनके मेंटॉर वसीम जाफर और बचपन के कोच मनीष ओझा ने उनकी सफलता के पीछे की असली वजह कुछ और बताई है. युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी इस समय इंडिया ए टीम के साथ श्रीलंका दौरे पर हैं, लेकिन उनकी चर्चा सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है. वहीं क्रिकेट जगत में हर तरफ उनके प्रदर्शन और प्रतिभा की बात हो रही है. 

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वसीम जाफर ने एक इंटरव्यू में कहा कि उन्होंने वैभव को क्रिकेट की कुछ अहम बारीकियां सिखाई हैं. हालांकि उन्होंने यह भी माना कि उन्होंने जो बातें वैभव को बताई, वही कई अन्य बल्लेबाजों को भी बताई थीं. लेकिन फर्क इस बात का रहा कि वैभव ने उन सीखों को बहुत तेजी से समझा और उन्हें अपने खेल में उतार लिया. जाफर के मुताबिक, सीखने की यही क्षमता और उसे मैदान पर लागू करने का हुनर वैभव को बाकी खिलाड़ियों से अलग बनाता है. उनका मानना है कि वैभव की तेजी से सीखने और खुद को बेहतर बनाने की आदत ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है.

सिर्फ क्रिकेट नहीं, ऊपरवाले की भी मेहरबानी- मनीष ओझा

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वैभव सूर्यवंशी के कोच मनीष ओझा का मानना है कि उनकी सफलता के पीछे सिर्फ क्रिकेटिंग स्किल्स नहीं हैं. TV9 से बातचीत में उन्होंने कहा कि वैभव एक अलग स्तर के खिलाड़ी हैं और उन्हें खास बनाने में ईश्वर की विशेष कृपा भी शामिल है. मनीष ओझा ने कहा कि कोई भी कोच, माता-पिता या सिस्टम अकेले ऐसा खिलाड़ी तैयार नहीं कर सकता. उन्होंने खुद को सिर्फ एक माध्यम बताया और कहा कि वह खुद को भाग्यशाली मानते हैं कि उन्हें पिछले पांच वर्षों तक वैभव को प्रशिक्षित करने का अवसर मिला.

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क्या है वैभव की सफलता का सबसे बड़ा कारण?

मनीष ओझा के अनुसार, वह हजारों बच्चों को क्रिकेट की ट्रेनिंग देते हैं, लेकिन हर कोई वैभव जैसा नहीं बन पाता. उनका मानना है कि मेहनत और प्रशिक्षण एक खिलाड़ी को एक स्तर तक जरूर पहुंचा सकते हैं, लेकिन असाधारण प्रतिभा ईश्वर का आशीर्वाद होती है.

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उन्होंने कहा कि क्रिकेट में सफलता के लिए मेहनत बेहद जरूरी है, लेकिन कुछ खिलाड़ी ऐसे होते हैं जिनके पास जन्मजात प्रतिभा होती है. यही वजह है कि सचिन तेंदुलकर और युवराज सिंह जैसे खिलाड़ी इतिहास में अपनी अलग पहचान बना पाए. ओझा का मानना है कि वैभव सूर्यवंशी भी उसी दिशा में आगे बढ़ते दिखाई दे रहे हैं.