भारतीय महिला क्रिकेट टीम की युवा स्टार शेफाली वर्मा ने वर्ल्ड कप फाइनल में जो कारनामा किया, वह आने वाले सालों तक याद रखा जाएगा. साउथ अफ्रीका के खिलाफ खेले गए इस रोमांचक फाइनल में भारत ने पहली बार महिला वर्ल्ड कप का खिताब जीता और इस ऐतिहासिक जीत की सबसे बड़ी नायिका रहीं शेफाली वर्मा.

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सिर्फ 21 साल की शेफाली ने फाइनल में 78 गेंदों पर 87 रन की विस्फोटक पारी खेली और फिर गेंदबाजी में भी दो महत्वपूर्ण विकेट झटके. उनका कहना है कि इस आत्मविश्वास और जोश के पीछे एक खास वजह थी मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर से हुई कुछ सेकेंड की बातचीत.

वो कुछ सेकंड की बातचीत जिसने बदला खेल

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फाइनल से कुछ घंटे पहले शेफाली ने मैदान पर सचिन तेंदुलकर को देखा और उनसे कुछ पल बात की. उस बातचीत को शेफाली अपनी जिंदगी का टर्निंग पॉइंट बताती हैं. उन्होंने कहा, "जब मैंने उन्हें (सचिन तेंदुलकर) देखा, तो मेरे अंदर एक अलग ही जोश आ गया. मैं लगातार उनसे बात करती रही और वो मुझे आत्मविश्वास देते रहे. वो क्रिकेट के मास्टर हैं, और सिर्फ उन्हें देखकर ही प्रेरणा मिलती है.”

फाइनल में शेफाली का जलवा

भारत की पारी की शुरुआत ही शेफाली ने तूफानी अंदाज में की. उन्होंने स्मृति मंधाना (45 रन) और जेमिमा रॉड्रिग्स (24 रन) के साथ मिलकर भारत को मजबूत शुरुआत दी.  शेफाली की पारी में चौकों-छक्कों की झड़ी लग गई, जिससे साउथ अफ्रीकी गेंदबाजों का मनोबल टूट गया. भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 298/7 का विशाल स्कोर खड़ा किया, जिसमें शेफाली का योगदान सबसे अहम रहा. 

शेफाली मुस्कुराते हुए आगे कहा, "मैच से पहले सिर्फ सचिन सर को देखकर ही मुझे यकीन हो गया था कि आज मैं कुछ खास कर सकती हूं." 

हरमनप्रीत का 'गट फीलिंग' ने बदला खेल

जब साउथ अफ्रीका की टीम एक समय मैच पर पकड़ बना चुकी थी, तब कप्तान हरमनप्रीत कौर ने शेफाली को गेंद सौंपी और यहीं से खेल पलट गया. शेफाली ने लगातार दो गेंदों पर दो विकेट लेकर मैच का रुख भारत की तरफ मोड़ दिया. 

हरमनप्रीत ने बाद में कहा, “वो एक गट फीलिंग थी. मुझे लगा ये थोड़ा रिस्की हो सकता है, लेकिन मुझे उसपर भरोसा था. जब मैंने उसे गेंद सौंपी और उसने लगातार दो विकेट लिए, वहीं से मैच पूरी तरह हमारे पक्ष में चला गया.”

संघर्ष से शिखर तक की कहानी

पिछले साल शेफाली को भारतीय टीम से बाहर कर दिया गया था. खराब फॉर्म और आत्मविश्वास की कमी ने उन्हें टीम में जगह नही दी. वर्ल्डकप में ओपनर प्रतिका रावल के चोटिल होने के बाद जब शेफाली को मौका मिला, तो उन्होंने इस मौके का पूरी तरह से फायदा उठाया. 

भावुक शेफाली ने जीत अपने साथियों और सीनियर खिलाड़ियों को समर्पित की. उन्होंने कहा, "मैं बहुत खुश हूं कि हमने आखिर विश्वकप जीत लिया है. इसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता. यह आसान नहीं था, लेकिन मुझे खुद पर भरोसा था कि अगर मैं शांत रहूंगी, तो सब कुछ मुमकिन है."