इंग्लैंड दौरे पर अब तक रोहित शर्मा का बल्ला उम्मीदों के मुताबिक नहीं चला है. लगातार नाकामी के बाद सवाल उठने लगे हैं कि क्या टीम इंडिया के कप्तान का समय खत्म होने की ओर है? लेकिन जो लोग रोहित शर्मा को करीब से जानते हैं, उनका मानना है कि उन्हें अभी खारिज करना सबसे बड़ी भूल होगी. लॉर्ड्स में होने वाले निर्णायक वनडे से पहले सबसे बड़ा सवाल यही है- क्या रोहित शर्मा एक बार फिर अपनी कहानी बदल देंगे?

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रोहित शर्मा के करियर को करीब से देखने वालों का मानना है कि रोहित का असली खेल सिर्फ रन बनाना नहीं, बल्कि मुश्किल वक्त में खुद को फिर से खड़ा करना है. 

वरिष्ठ पत्रकार बोरिया मजूमदार बताते हैं कि बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी के आखिरी टेस्ट से पहले रोहित नेट्स में ज्यादा बल्लेबाजी नहीं कर रहे थे. जब उनसे पूछा गया कि वह बैटिंग क्यों नहीं कर रहे, तो उन्होंने कहा, "मैं अभी जाकर आता हूं, फिर बल्लेबाजी करूंगा."

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रोहित बाद में लौटे जरूर, लेकिन उनकी बल्लेबाजी में आत्मविश्वास नजर नहीं आया. इसके बाद उन्होंने खुद उस टेस्ट से बाहर रहने का फैसला किया. उस दिन उनके चेहरे पर निराशा और हार मानने का एहसास साफ दिखाई दे रहा था.

लेकिन कार्डिफ और बर्मिंघम में तस्वीर अलग थी. भले ही रन नहीं बने, लेकिन नेट्स में उनकी मेहनत, फिटनेस, अभ्यास की तीव्रता और मैदान पर उनका इरादा यह बता रहा था कि उन्होंने अभी हार नहीं मानी है. यही वजह है कि उन्हें लेकर अभी भी उम्मीद बाकी है.

मजूमदार ने किस्सों की बरसात करते हुए बताया कि रोहित शर्मा की शख्सियत को समझाने के लिए एक और किस्सा सामने आता है. एक पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में शामिल होने का उन्होंने वादा किया था. आईपीएल मैच खत्म होने के बाद फ्लाइट नहीं मिली तो उन्होंने सड़क मार्ग से लंबा सफर तय किया और समय पर कार्यक्रम में पहुंच गए. उनका सिर्फ इतना कहना था कि उन्होंने वादा किया था, इसलिए आना ही था.

यही रोहित शर्मा की सबसे बड़ी पहचान मानी जाती है कि वो अपने फैसलों और वादों पर अडिग रहते हैं.

यही बात उनके भविष्य पर भी लागू होती है. अगर उन्हें यह भरोसा नहीं होता कि वह 2027 वनडे विश्व कप तक भारत के लिए खेल सकते हैं, तो शायद वह खुद ही कप्तानी और अपनी जगह छोड़ देते. लेकिन पिछले कुछ महीनों में जिस तरह उन्होंने अपनी फिटनेस पर काम किया और खुद को पूरी तरह बदल दिया, उससे साफ संकेत मिलता है कि उनका लक्ष्य अभी खत्म नहीं हुआ है.

बोरिया बताते हैं कि रोहित का एक और पहलू उनकी सहजता है. वह दबाव को अपने ऊपर हावी नहीं होने देते. फैसले दिल और भरोसे से लेते हैं. यही कारण है कि खराब फॉर्म के बावजूद टीम प्रबंधन और उनके करीब रहने वाले लोगों का विश्वास कायम है.

अब सबकी निगाहें लॉर्ड्स पर हैं. अगर रोहित शर्मा यहां बड़ी पारी खेलते हैं तो सारी आलोचनाएं एक झटके में शांत हो सकती हैं और उनके करियर को नई दिशा मिल सकती है. लेकिन अगर बल्ला फिर खामोश रहा, तो उनके भविष्य पर बहस और तेज हो जाएगी.

फिलहाल कहानी खत्म नहीं हुई है. लॉर्ड्स शायद रोहित शर्मा के करियर का अगला और सबसे अहम अध्याय लिखने वाला है.

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