क्रिकेट में कई रिकॉर्ड रन, विकेट और शतकों से बनते हैं. लेकिन कभी-कभी ऐसा भी होता है जब कोई टीम अपनी रणनीति से इतिहास रच देती है. सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में ऐसा ही एक अनोखा रिकॉर्ड देखने को मिला, जिसने टी20 क्रिकेट के इतिहास में नया अध्याय जोड़ दिया.

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मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में दिल्ली और मणिपुर के बीच मुकाबला खेला गया था. टॉस जीतकर मणिपुर ने पहले बल्लेबाजी चुनी, लेकिन उसकी शुरुआत बेहद खराब रही. टीम ने सिर्फ 41 रन तक अपने 6 विकेट गंवा दिए थे. ऐसे में लग रहा था कि पारी जल्दी समाप्त हो जाएगी.

हालांकि दिल्ली की टीम ने एक अलग रास्ता चुना. कप्तान आयुष बडोनी ने मैच के दौरान अपनी प्लेइंग इलेवन के हर खिलाड़ी को गेंद थमाई. टी20 क्रिकेट के इतिहास में यह पहला मौका बना जब किसी टीम के सभी 11 खिलाड़ियों ने एक ही पारी में गेंदबाजी की.

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दिल्ली की ओर से आयुष बडोनी, अनुज रावत, आयुष सिंह, अखिल चौधरी, हर्ष त्यागी, दिग्वेश राठी, मयंक रावत, आर्यन राणा, हिम्मत सिंह, प्रियांश आर्य और यश ढुल ने गेंदबाजी की. सभी खिलाड़ियों को गेंदबाजी का मौका मिलने से मैच में एक दुर्लभ रिकॉर्ड दर्ज हो गया.

मणिपुर ने शुरुआती झटकों के बाद 20 ओवर में 8 विकेट पर 120 रन बनाए. इसके जवाब में दिल्ली ने 18.3 ओवर में 6 विकेट खोकर 124 रन बनाते हुए मुकाबला अपने नाम कर लिया.

इस रिकॉर्ड की सबसे खास बात यह है कि इसकी बराबरी तो भविष्य में कोई टीम कर सकती है, लेकिन इसे तोड़ना लगभग असंभव है. कारण साफ है. क्रिकेट की एक प्लेइंग इलेवन में सिर्फ 11 खिलाड़ी होते हैं और दिल्ली ने सभी 11 खिलाड़ियों से गेंदबाजी करा दी.

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इससे पहले टी20 क्रिकेट में एक पारी में सबसे ज्यादा 9 खिलाड़ियों से गेंदबाजी कराने का रिकॉर्ड था. वहीं टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट में भी कई टीमें अधिकतम 9 गेंदबाजों का इस्तेमाल कर चुकी हैं. डेनमार्क ने यह उपलब्धि दो बार हासिल की है. भारतीय टीम भी एक पारी में 8 गेंदबाजों से गेंदबाजी करा चुकी है.

क्रिकेट के इतिहास में कुछ रिकॉर्ड आंकड़ों से नहीं बल्कि अनोखे फैसलों से बनते हैं. दिल्ली का यह फैसला भी ऐसा ही रहा. एक ही पारी में 11 गेंदबाजों का इस्तेमाल कर टीम ने ऐसा रिकॉर्ड बना दिया, जो आने वाले वर्षों तक चर्चा का विषय बना रहेगा.

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