जालंधर के युवा स्प्रिंटर गुरिंदरवीर सिंह ने 100 मीटर दौड़ 10.09 सेकंड में पूरी कर नया नेशनल रिकॉर्ड बनाया. महज दो दिनों के भीतर 2 एथलिट ने 100 मीटर रेस में 3 बार नेशनल रिकॉर्ड तोड़ा, ये कमाल गुरिंदरवीर सिंह और अनिमेष कुजूर ने किया. इन दोनों खिलाड़ियों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात में बात की. 

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प्रधानमंत्री मोदी ने दोनों खिलाड़ियों से कहा कि हमने संगीत में तो जुगलबंदी देखी है, लेकिन चुनौती में भी. एक चुनोती दे और दूसरा उसे उठा ले. ये बड़ा मजेदार विषय है. मैं चाहता हूं कि आपने जो पराक्रम किया, उसका 'मन की बात' के श्रोताओं को पता चले.

अनिमेष ने कहा, मैं 200 और 400 मीटर का नेशनल रिकॉर्ड होल्डर हूं और छत्तीसगढ़ का रहना वाला हूं. अभी मैं उड़ीसा से खेलता हूं. पिछले साल एशियाई मेडल और वर्ल्ड यूनिवर्सिटी गेम्स मैडल लेकर आया हूं. जब मैंने स्कूल से पढ़ाई पूरी की थी, उसके बाद मैंने एथलेटिक्स 2021 से चालू किया. मैं पहले फुटबॉल खेला करता था, मेरे माता-पिता कोरोना के समय मुझे थोड़ी बहुत छूट देते थे कि तू जाके बाहर दौड़ ले या खेल ले. जब कोरोना खत्म होने लगा तो मेरे फुटबॉल के जो दोस्त थे उन्होंने मुझे बोला कि स्टेट मीट होने वाला है जाके तू हिस्सा ले और तब मैंने हिस्सा लिया. मुझे पता नहीं था कि वहां से नेशनल लेवल का सिलेक्शन है. मैं वहां से नेशनल में चुना गया और आज मैं भारत को रिप्रेजेंट कर रहा हूं."

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गुरिन्दरवीर ने बताया, "मैं इंडियन नेवी में Petty अफसर हूं और मैं भारत का सबसे तेज स्प्रिंटर हूं. मैंने अभी 100 मीटर में 10.09 का नेशनल रिकॉर्ड बनाया है। मैं पहला भारतीय हूं जो 10.1 के बैरियर के नीचे भागा है. मेरे पिता भी वॉलीबॉल खेलते थे. घर की प्रॉब्लम की वजह से उन्होंने अपना खेल छोड़ दिया था. उनका जो सपना पूरा करने वाला रह गया. तो उन्होंने मेरे अंदर वो सपना देखा कि मेरा बेटा वो सपना पूरा करेगा तो मैं उनसे बातें करता था, फिर सुनता था मिल्खा सिंह इतनी मेहनत करते थे. मैं उनको बोलता था मैं भी एक दिन आपका सपना पूरा करूंगा, तो बोलते थे सपना पूरा ऐसे नहीं होता, उसके लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है. मिल्खा सिंह जी खून की उल्टियां करते थे, धूप में भागते थे. सारा-सारा दिन ट्रेनिंग करते थे तो वो चीजें मुझे मोटीवेट करती थी. मेरे पिता मेरे को इंस्पायर करते थे, कि मैं भागूंगा तो अपने देश के लिए, देश के लिए पदक जीतूं."

PM Modi ने पूछा सफलता का राज

प्रधानमंत्री ने उनसे पूछा, "100 मीटर रेस में दौड़ना, जैसा गुरिन्दरवीर ने कहा कि लोग कहते हैं कि भारत के लोगों का तो बदन इस काम के लिए है ही नहीं. इतना मुश्किल होते हुए भी आपने काम किया तो ये दोनों से मैं जानना चाहूंगा और ‘मन की बात’ के श्रोता भी सुनना चाहेंगे कि कौन सा जज्बा था, क्या जिद थी, क्या सोचा था, और कैसे कर रहे थे ? ये कितना मुश्किल होता है ?

गुरिन्दरवीर ने कहा, "शुरुआत में बहुत स्ट्रगल था, बहुत बार डाउट भी आया कि मैं सही कर रहा हूं? मैंने सही चुना है? क्योंकि हर बार आप नहीं जीतते, कभी- कभी आप सीखते हो. जब मैं हारता था, जब मेरी सही परफॉरमेंस नहीं आती थी, कोई इंजरी आ जाती थी तो मेरे घरवाले मेरे को सपोर्ट करते थे कि कोई नहीं एक दिन बुरा चला गया, एक साल बुरा चला गया तो इससे जिंदगी खराब नहीं होती. सपने देखना नहीं छोड़ते. मेरे कोच ने भी मेरे को ये सिखाया कि अगर तू नहीं करेगा तो कोई और नहीं कर पाएगा. तो ऐसे जब हमारी कम्युनिटी हमारे आसपास लोग हमें उत्साहित करते हैं तो हमारा कभी वो मोटिवेशन नहीं टूटता."

अनिमेष ने कहा, "जब मैंने 2021 में शुरू किया तो लोग मुझे बोलते थे कि नया फील्ड है, तू कर पाएगा या नहीं? तो मैं बोला कि अब मैं इस फील्ड में घुसा हूं तो करूंगा ही. मेरे पापा भी हमेशा मुझे बोलते थे कि तू इस फील्ड में घुसा है तो कभी पीछे मुड़के मत देखना क्योंकि सोचते तो सभी है की ये करना है, वो करना है लेकिन करके बहुत कम ही दिखाते है. तू बस इस फील्ड में घुसा है तो इस पे अमल रहना, इस पे आगे बढ़ना है. तुम्हे हम हम हर चीज से सपोर्ट करेंगे. तू इंडिया को दिखा कि भारतीय भी भाग सकते हैं क्योंकि ये मुझे भी लोग बोलते थे कि भारतीयों के जींस ऐसे नहीं है कि वो 10 या 10.1 के अंदर भाग सकते हैं. हम दोनों ने ये साबित कर दिया कि भारतीय भी कर सकते हैं."