भारतीय क्रिकेट टीम को जब जुलाई 2024 में गौतम गंभीर के रूप में नया हेड कोच मिला, तब फैंस को बड़ी उम्मीदें थीं. माना जा रहा था कि मैदान पर अपने बेबाक अंदाज और जीत की भूख के लिए मशहूर गंभीर, टीम इंडिया को नई ऊंचाइयों तक ले जाएंगे. हालांकि समय बीतने के साथ तस्वीर कुछ और ही नजर आई. जीत से ज्यादा चर्चा हार, टूटे रिकॉर्ड और शर्मनाक नतीजों की होने लगी.

बड़ी ट्रॉफी जरूर आईं, लेकिन फिर भी उठे सवाल

गंभीर की कोचिंग में भारत ने कुछ अहम टूर्नामेंट जरूर जीते, जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.

गंभीर के दौर की बड़ी उपलब्धियां:

2025 चैंपियंस ट्रॉफी का खिताब

2025 एशिया कप की जीत

इन जीतों ने फैंस को खुशी दी, लेकिन इसके साथ जो खराब रिकॉर्ड बने, उन्होंने गंभीर के कार्यकाल पर सवाल भी खड़े कर दिए हैं.

टेस्ट क्रिकेट में भारत की साख को तगड़ा झटका

टेस्ट क्रिकेट में भारत सालों से अपने घर में अजेय माना जाता रहा है. लेकिन गंभीर की कोचिंग में वही किला सबसे पहले ढहता नजर आया. गंभीर की कोचिंग में टीम ने ऐसे रिकॉर्ड बनाए, जिन्हें कोई भी भूलना चाहेगा.

टेस्ट में बने शर्मनाक रिकॉर्ड

1988 के बाद पहली बार न्यूजीलैंड से घरेलू टेस्ट सीरीज हारी

2012 के बाद पहली बार घरेलू टेस्ट सीरीज में मिली हार

नंवबर 2024 में ही 2000 के बाद पहली बार घरेलू टेस्ट सीरीज में क्लीन स्वीप 

घरेलू टेस्ट क्रिकेट में भारत का अब तक का सबसे कम स्कोर - 46 रन (अक्टूबर 2024)

नवंबर 2025 में रनों के लिहाज से भी भारत की सबसे बड़ी टेस्ट हार मिली.

पहली बार वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल में भी जगह नहीं बना पाए

2015 के बाद पहली बार बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी गंवाई

ये आंकड़े बताते हैं कि टेस्ट क्रिकेट में भारत की पकड़ कितनी कमजोर पड़ी.

वनडे में भी बिगड़े हालात

वनडे क्रिकेट में भी हालात कुछ अलग नहीं रहे. रविवार, 18 जनवरी को इंदौर में न्यूजीलैंड से तीसरा वनडे हारकर भारत ने सीरीज 1-2 से गंवा दी. न्यूजीलैंड ने पहली बार भारत में वनडे सीरीज जीत कर भारत का ये घमंड भी तोड़ दिया. 

फैंस की बढ़ती निराशा

पिछले भारतीय कोचों ने कड़ी मेहनत से जो रिकॉर्ड बनाए थे या संभालकर रखे थे, वे गौतम गंभीर के आने के बाद एक-एक कर टूट गए. फैंस के लिए सबसे बड़ा झटका हार नहीं, बल्कि टीम इंडिया की उस मजबूत पहचान का कमजोर होना है. अब सवाल साफ है - क्या गंभीर हालात संभाल पाएंगे या भारतीय क्रिकेट को यह मुश्किल दौर अभी और झेलना पड़ेगा?