फॉकलैंड बैनर विवाद पर व्हाइट हाउस की एंट्री, अब FIFA ले सकता है बड़ा एक्शन
FIFA World Cup 2026: फीफा वर्ल्ड कप 2026 के सेमीफाइनल में इंग्लैंड पर अर्जेंटीना की जीत के बाद अर्जेंटीना के कुछ खिलाड़ियों ने फॉकलैंड द्वीप समूह पर अपने देश के दावे वाला बैनर लहराया था.

फीफा वर्ल्ड कप 2026 के सेमीफाइनल में इंग्लैंड पर अर्जेंटीना की जीत के बाद जश्न अब नए विवाद में बदल गया है. मैच खत्म होने के बाद अर्जेंटीना के कुछ खिलाड़ियों ने फॉकलैंड द्वीप समूह पर अपने देश के दावे वाला बैनर लहराया, जिसके बाद यह मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आ गया. ब्रिटेन ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए खिलाड़ियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है. वहीं, अब इस पूरे विवाद पर व्हाइट हाउस की भी प्रतिक्रिया सामने आई है. दूसरी ओर, फीफा की अनुशासन समिति मामले की जांच कर रही है.
व्हाइट हाउस ने खिलाड़ियों का किया बचाव
व्हाइट हाउस का कहना है कि यह मामला अभिव्यक्ति की आजादी से जुड़ा है. यह प्रतिक्रिया फाइनल मुकाबले से पहले आयोजित फीफा वर्ल्ड कप टास्क फोर्स की मीडिया ब्रीफिंग के दौरान सामने आई. ब्रीफिंग में सुरक्षा इंतजाम, न्यू जर्सी में होने वाले फाइनल की तैयारियों और कनाडा के जंगलों में लगी आग की वजह से खराब हुई हवा की गुणवत्ता जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई. हालांकि, फॉकलैंड बैनर विवाद भी मीडिया के प्रमुख सवालों में शामिल रहा.
अमेरिकी अधिकारी ने क्या कहा?
मीडिया ब्रीफिंग के दौरान व्हाइट हाउस टास्क फोर्स के कार्यकारी निदेशक एंड्रयू गियुलियानी से पूछा गया कि क्या अमेरिका की नजर में खिलाड़ियों का स्टेडियम में राजनीतिक संदेश देना उचित था, जबकि फॉकलैंड द्वीप ब्रिटेन के नियंत्रण वाला क्षेत्र है. इस सवाल के जवाब में उन्होंने खिलाड़ियों की आलोचना करने से इनकार कर दिया. उनका कहना था कि अमेरिका में प्रथम संशोधन के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार है और हर व्यक्ति को अपनी बात रखने की आजादी प्राप्त है.
फॉकलैंड बैनर पर क्यों मचा विवाद?
इंग्लैंड को 2-1 से हराने के बाद अर्जेंटीना के कई खिलाड़ी मैदान पर एक बैनर के साथ नजर आए, जिस पर स्पेनिश भाषा में ‘Las Malvinas Son Argentinas’ लिखा था. इसका हिंदी अर्थ है, ‘फॉकलैंड द्वीप अर्जेंटीना का है.’ फॉकलैंड द्वीप को लेकर अर्जेंटीना और ब्रिटेन के बीच दशकों पुराना विवाद है. साल 1982 में दोनों देशों के बीच युद्ध भी हो चुका है और यह मुद्दा आज भी दोनों देशों के लिए बेहद संवेदनशील माना जाता है.
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FIFA कर रहा है जांच, हो सकती है कार्रवाई
व्हाइट हाउस ने भले ही खिलाड़ियों का बचाव किया हो, लेकिन फीफा के नियम किसी भी तरह के राजनीतिक संदेश के सार्वजनिक प्रदर्शन की अनुमति नहीं देते. फीफा वर्ल्ड कप मैच प्रोटोकॉल के अनुच्छेद 34.3 के मुताबिक, कोई भी खिलाड़ी या टीम अधिकारी मैच से पहले, मैच के दौरान या मैच के बाद राजनीतिक, धार्मिक या व्यक्तिगत संदेश सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित नहीं कर सकता.
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फीफा ने पुष्टि की है कि उसकी स्वतंत्र अनुशासन समिति पूरे मामले की जांच कर रही है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक खिलाड़ियों पर निलंबन की संभावना फिलहाल कम है, लेकिन उन्हें चेतावनी या जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है. वहीं, ब्रिटेन लगातार इस मामले में सख्त कार्रवाई की मांग कर रहा है.



















