फीफा वर्ल्ड कप 2026 के दौरान एक बड़ा विवाद सामने आया है. अमेरिका के स्ट्राइकर फोलारिन बालोगुन को रेड कार्ड मिलने के बाद एक मैच के लिए निलंबित किया गया था, लेकिन बाद में उनकी सजा को 12 महीने के लिए स्थगित कर दिया गया. इस फैसले के बाद फीफा की अनुशासनात्मक प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं. राउंड ऑफ-32 में बोस्निया और हर्जेगोविना के खिलाफ मुकाबले में बालोगुन को रेड कार्ड मिला था. नियमों के मुताबिक उन्हें बेल्जियम के खिलाफ राउंड ऑफ-16 मैच से बाहर रहना था. हालांकि बाद में फीफा ने उनकी एक मैच की सजा को 12 महीने के लिए टाल दिया, जिससे वह अगले मुकाबले में खेलने के लिए उपलब्ध हो गए.
रिपोर्ट के मुताबिक फीफा की 18 सदस्यीय अनुशासनात्मक समिति में से सिर्फ चेयरमैन मोहम्मद अल-कमाली ने यह फैसला लिया. हैरानी की बात यह रही कि बाकी 17 सदस्यों से इस मामले में कोई राय नहीं ली गई. आमतौर पर इस तरह के मामलों में समिति के एक सदस्य और जॉर्ज पलासियो की मौजूदगी वाला पैनल फैसला करता है. वहीं किसी बड़े या मिसाल बनने वाले मामले में तीन सदस्यीय पैनल निर्णय लेता है. ऐसे में सिर्फ चेयरमैन द्वारा अकेले फैसला लिया जाना असामान्य माना जा रहा है.
क्या है डोनाल्ड ट्रंप का कनेक्शन?
फीफा ने पुष्टि की है कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फैन्टिनो से फोलारिन बालोगुन को मिले रेड कार्ड की समीक्षा करने का अनुरोध किया था. ट्रंप ने भी बाद में सार्वजनिक रूप से इस हस्तक्षेप की पुष्टि की.
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इस पूरे मामले को लेकर इसलिए भी सवाल उठ रहे हैं क्योंकि टूर्नामेंट में अब तक रेड कार्ड पाने वाले बाकी 13 खिलाड़ियों में किसी की भी सजा स्थगित नहीं की गई. अन्य सभी खिलाड़ियों ने या तो अपना निलंबन टूर्नामेंट के दौरान पूरा किया या फिर उनकी टीम बाहर होने के बाद वह सजा लागू रहेगी. बालोगुन इकलौते खिलाड़ी हैं, जिनकी सजा इस तरह टाली गई है.
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