फीफा वर्ल्ड कप 2026 में इतिहास रचने वाले कुरासाओ के खिलाड़ी न तो अपने देश के लिए पेशेवर स्तर पर खेलने वाले अनुभवी सितारे हैं और न ही उनकी टीम किसी बड़ी फुटबॉल ताकत के रूप में जानी जाती है. फिर भी, मैदान पर उतरते ही उन्होंने जर्मनी के खिलाफ खेले गए अपने पहले ही मैच में इतिहास रच दिया. दरअसल, फीफा वर्ल्ड कप में यह कुरासाओ का डेब्यू मुकाबला था. ऐसे में टीम ने टूर्नामेंट के इतिहास में अपना पहला गोल दागकर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की. खास बात रही कि यह गोल जर्मनी जैसी मजबूत और अनूभवी टीम के खिलाफ आया, जिससे इसकी अहमियत और बढ़ गई.

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हालांकि, मैच के नतीजे की बात करें तो जर्मनी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए मुकाबले को 7-1 के बड़े अंतर से अपने नाम कर लिया. इसके बावजूद कुरासाओ का यह गोल उनके फुटबॉल इतिहास में हमेशा याद रखा जाएगा, क्योंकि यह फीफा वर्ल्ड कप मंच पर उनका पहला गोल था.

इस फीफा वर्ल्ड कप में पहली बार खेलने उतरी कुरासाओ की टीम को लेकर एक खास बात ये भी है कि उसमें एक को छोड़कर सारे खिलाड़ी नीदरलैंड्स के हैं. बता दें कि ताहित चॉन्ग ही कुरासाओ की टीम में शामिल एकमात्र ऐसे खिलाड़ी हैं, जिनका जन्म कुरासाओ में हुआ था. हालांकि, बाद में उन्होंने नीदरलैंड्स का रुख कर लिया. वह रॉटरडम में बड़े हुए और नीदरलैंड्स की अंडर-21 टीम का भी प्रतिनिधित्व कर चुके हैं.

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सिर्फ खिलाड़ी ही नहीं, बल्कि कुरासाओ की टीम के कोच भी देश के मूल निवासी नहीं  हैं. टीम के मुख्य कोच डिक एडवोकाट नीदरलैंड्स से आते हैं. बेटी की बिगड़ती सेहत को देखते हुए उन्होंने कुछ समय के लिए कोच पद छोड़ दिया था. हालांकि, मई में उन्होंने दोबारा वापसी की और अपनी कोचिंग में कुरासाओ को पहली बार फीफा वर्ल्ड कप तक पहुंचाने का सपना साकार किया.

यही वजह रही कि जर्मनी के खिलाफ टीम के ऐतिहासिक डेब्यू मैच से पहले एडवोकाट भावुक हो गए और उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े. 78 वर्षीय एडवोकाट फीफा वर्ल्ड कप के इतिहास के सबसे उम्रदराज मैनेजर भी हैं.