रणजी खिलाड़ियों की अनदेखी पर भड़के सुनील गावस्कर, DC के 8.4 करोड़ वाले गेंदबाज का लिया नाम
रणजी ट्रॉफी में शानदार प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को पहचान सिर्फ आईपीएल ऑक्शन के बाद ही क्यों मिलती है? सुनील गावस्कर ने घरेलू क्रिकेटर्स की अनदेखी पर सवाल उठाए हैं.

भारतीय घरेलू क्रिकेट को लेकर एक बार फिर बड़ी बहस छिड़ गई है. टीम इंडिया के पूर्व कप्तान सुनील गावस्कर ने रणजी ट्रॉफी खिलाड़ियों को लेकर मीडिया और क्रिकेट सिस्टम दोनों पर सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि देश के सबसे बड़े घरेलू टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को उतनी पहचान नहीं मिलती, जितनी आईपीएल या अंडर-19 वर्ल्ड कप में खेलने वालों को मिल जाती है.
रणजी खेलने वालों को कब मिलेगी पहचान?
गावस्कर ने अपने कॉलम में कई ऐसे बल्लेबाजों का जिक्र किया जिन्होंने इस सीजन में 700 से ज्यादा रन बनाए हैं, लेकिन उनके प्रदर्शन पर ज्यादा चर्चा नहीं हुई है. इनमें रविचंद्रन स्मरण, सनत सांगवान, दीप कुमार घरामी, सिद्धेश लाड, अरमान जाफर और कुनाल चंदेला जैसे नाम शामिल हैं.
इसके अलावा गेंदबाजों में मंयक मिश्रा और सिद्धार्थ देसाई ने इस सीजन में 40 से ज्यादा विकेट लिए, लेकिन उनके प्रदर्शन पर भी ज्यादा खबरें देखने को नहीं मिलीं.
8.4 करोड़ के तेज गेंदबाज का लिया नाम
उन्होंने उदाहरण देते हुए जम्मू-कश्मीर के तेज गेंदबाज अकीब नबी का नाम लिया. गावस्कर के मुताबिक, रणजी ट्रॉफी में लगातार अच्छा प्रदर्शन करने के बावजूद अगर उन्हें दिल्ली कैपिटल्स ने आईपीएल ऑक्शन में 8.4 करोड़ रुपये में नहीं खरीदा होता, तो शायद उनके बारे में इतनी चर्चा भी नहीं होती.
IPL बना पहचान का शॉर्टकट?
गावस्कर ने कहा कि आजकल खिलाड़ियों को असली पहचान तभी मिलती है जब वे आईपीएल में खेलते नजर आते हैं. टीवी कवरेज और सोशल मीडिया की वजह से आईपीएल में अच्छा प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को तुरंत सुर्खियां मिल जाती हैं. वहीं रणजी ट्रॉफी में रन बनाने या विकेट लेने वाले खिलाड़ी अक्सर खबरों से गायब रहते हैं.
उन्होंने यह भी कहा कि कई लोग आईपीएल और अंडर-19 वर्ल्ड कप को टीम इंडिया तक पहुंचने का शॉर्टकट मानते हैं, लेकिन सवाल यह है कि क्या इसके लिए सिर्फ चयनकर्ता जिम्मेदार हैं या फिर मीडिया और क्रिकेट से जुड़े दूसरे प्लेटफॉर्म भी जो घरेलू खिलाड़ियों को नजरअंदाज कर देते हैं?
बदलनी होगी सोच
गावस्कर का मानना है कि अगर भारतीय क्रिकेट को मजबूत बनाना है तो घरेलू क्रिकेट को भी उतनी ही प्राथमिकता देनी होगी. रणजी ट्रॉफी में अच्छा प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ी ही आगे चलकर इंटरनेशनल स्तर पर टीम इंडिया की रीढ़ बनते हैं.
उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में रणजी ट्रॉफी के फाइनल जैसे बड़े मुकाबलों को भी ज्यादा कवरेज मिलेगा, ताकि घरेलू क्रिकेट में मेहनत करने वाले खिलाड़ियों को उनका हक मिल सके. फिलहाल, उनका यह बयान क्रिकेट जगत में चर्चा का बड़ा विषय बन गया है और घरेलू क्रिकेट की अहमियत पर नई बहस शुरू हो गई है.
Source: IOCL















