भारत के सबसे सफलतम कप्तानों में शुमार सौरव गांगुली ने अपने ताजा इंटरव्यू में बताया कि क्यों वीवीएस लक्ष्मण उनसे नाराज हो गए थे और 3 महीने तक बात नहीं की. उनसे गौतम गंभीर के बतौर हेड कोच करियर के बारे में पूछा गया और इसे रेट करने के बारे में कहा गया तो जानिए उन्होंने क्या कहा.

पीटीआई के साथ इस इंटरव्यू में सौरव गांगुली ने कई खुलासे और किस्से शेयर किए. उन्होंने बताया कि बतौर कप्तान मेरे लिए सबसे मुश्किल हरभजन सिंह और अनिल कुंबले में से किसी एक को चुनना होता था. "ये वो प्लेयर्स नहीं थे जो पांच दिन के टेस्ट में बाहर बैठकर ब्रेक का मजे लेंगे, ये वो प्लेयर्स थे जो आते थे और पूछते थे कि मैं क्यों नहीं खेल रहा हूं? कंडीशन मेरे अनुकूल हैं, फिर चाहे वे न भी हों. ऐसे चैंपियंस प्लेयर्स का होना सौभाग्य की बात थी, जो लगातार मैच खेलना और टीम के लिए जीतना चाहते थे."

लक्ष्मण ने क्यों नहीं की 3 महीने तक बात

वीवीएस लक्ष्मण का नाम देश के दिग्गज क्रिकेटर्स में लिया जाता है, उनका करियर भी शानदार रहा लेकिन बावजूद इसके वो कभी वर्ल्ड कप नहीं खेले. 2003 के वर्ल्ड कप से पहले उन्हें टीम से हटा दिया गया, उनकी जगह दिनेश मोंगिया को शामिल किया गया. इस फैसले के पीछे कप्तान सौरव गांगुली थे. अब इसको लेकर उन्होंने खुलकर बात की और बताया कि इसके बाद लक्ष्मण ने उनसे 3 महीने तक बात भी नहीं की थी.

इस इंटरव्यू में गांगुली ने बताया कि, "लक्ष्मण इसके बाद नाखुश और परेशां थे. उन्होंने 3 महीने से मुझसे बात नहीं की, जब तक कि मैंने उनसे सुलह नहीं कर ली. वर्ल्ड कप जैसे बड़े इवेंट से बाहर किए जाने पर कोई भी नाराज होगा, खासतौर पर लक्ष्मण जैसी क्षमता वाला प्लेयर. उनका नाखुश होना स्वाभाविक था. वर्ल्ड कप के बाद वो खुश थे कि हमारी टीम ने अच्छा प्रदर्शन किया."

गांगुली ने आगे कहा, "जब हम लौटे तो वो भी वनडे टीम में लौट आए, उन्होंने पाकिस्तान और ऑस्ट्रेलिया में शानदार प्रदर्शन किया. हमने पाकिस्तान में पहली बार जीत हासिल की और वीवीएस लक्ष्मण ने इसमें अहम भूमिका निभाई."

गौतम गंभीर की कोचिंग को लेकर क्या बोले गांगुली

गांगुली ने पीटीआई से बात करते हुए गौतम गंभीर की कोचिंग को लेकर कहा, "वह अपनी ड्यूटी को अच्छे से निभा रहे हैं. उनकी शुरुआत थोड़ी धीमी रही, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड से हार गए लेकिन उसके बाद टीम चैंपियंस ट्रॉफी जीती. इंग्लैंड के खिलाफ सीरीज उनके लिए बड़ी होने वाली है. मैंने उनके साथ काम नहीं किया है लेकिन वह जुनूनी है. मैं उनके साथ खेला हूं, वो बेहतरीन इंसान हैं और सीनियर्स का बहुत सम्मान करते हैं."

"मैं अब उन्हें देख रहा हूं, वह अपनी बातों को सीधे रखता है, जुनूनी हैं. वह हर चीज पर खुलकर बोलते हैं, चाहे टीम के बारे में हो, प्लेयर्स के बारे में. मैं उन्हें शुभकामनाएं देता हूं, लेकिन हां, सभी की तरफ वह भी सीखेंगे और आगे बढ़ेंगे."