क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर ने एक बार फिर मिसाल कायम करते हुए भारतीय व्हीलचेयर क्रिकेट टीम को उनके पहले विदेशी दौरे के लिए आर्थिक मदद दी. व्हीलचेयर टीम ने बांग्लादेश का दौरा किया और वहां तीन मैचों की सीरीज में 2-0 से जीत दर्ज की.

भारतीय व्हीलचेयर क्रिकेट के सचिव प्रदीप राज ने बताया कि एक महीने से वह टीम के दौरे के लिए साढ़े छह लाख रुपये जुटा रहे थे ताकि बांग्लादेश में सीरीज खेल सके लेकिन पूरी कोशिश के बाद भी वे सिर्फ दो लाख जुटा सके और फिर उनके दिमाग में तेंदुलकर से मदद मांगने का विचार आया.

उन्होंने कहा , ‘‘मेरी पूरी कोशिश के बाद भी मुझे सिर्फ एक प्रायोजक मिला जिसने हमें दो लाख रुपये दिये. मैंने व्हीलचेयर टीम के लिए कई लोगों से मदद मांगी लेकिन कहीं से कोई मदद नहीं मिली. मेरे पास सचिन सर ( तेंदुलकर ) का ई - मेल आईडी था और मैंने ई - मेल के जरिये उनसे मदद मांगी. मैं उनसे पैरा खेलों के दौरान मिला था.’’

राज ने कहा , ‘‘मुझे उस वक्त सुखद आश्चर्य हुआ जब तीन दिन के भीतर ही उनके ऑफिस ने मुझ से संपर्क किया और उन्होंने हमें साढ़े चार लाख रुपये दान दिए. अगर उनकी मदद नहीं मिलती तो भारतीय व्हीलचेयर क्रिकेट टीम को बांग्लादेश का दौरा रद्द करना पड़ता.’’

उन्होंने कहा , ‘‘उनकी मदद से हमने 19 खिलाड़ियों के लिए विमान के टिकट खरीदे और बची हुई रकम से सभी खिलाड़ियों को 10-10 हजार रुपये भी दिए.’’

राज ने कहा , ‘‘भारतीय जनता पार्टी के सांसद और भोजपुरी गायक - अभिनेता मनोज तिवारी ने भी टीम के सभी खिलाड़ियों को 10-10 हजार रुपये दिए. यह पहली बार है जब सभी भारतीय खिलाड़ियों को टूर्नामेंट में भाग लेने के लिए 20-20 हजार रुपये मिले.’’

उन्होंने कहा , ‘‘ढाका में हुए तीन मैचों की इस सीरीज का पहला मैच बारिश से धुल गया था जबकि अगले दो मैचों में भारतीय टीम ने जीत दर्ज की. यह दूसरी बार है जब व्हीलचेयर टीम ने किसी अंतरराष्ट्रीय सीरीज में भाग लिया. पिछली बार हमने बांग्लादेशी टीम को दिल्ली बुलाया था.’’

राज ने कहा कि उनके लिए तेंदुलकर की मदद से ज्यादा इस बात का महत्व है कि उनके जैसा शख्स दिव्यांग खिलाड़ियों के साथ खड़ा हुआ.

राज ने अपील करते हुए कहा , ‘‘हमें पता है कि ब्लाइंड क्रिकेटरों ने बीसीसीआई से मदद की मांग की है. हम क्रिकेट के प्रति समर्पित ऐसे खिलाड़ियों के समूह हैं जिसने जिंदगी में बड़ी त्रासदियां झेली हैं. अगर हमें मदद मिलती है तो इससे लोग करियर के दूसरे आयाम के बारे में भी सोच सकेंगे.’’