देवदत्त पडिक्कल ने गॉल में खेले जा रहे पहले टेस्ट के पहले दिन शानदार शतक जड़ा. वह 15 अगस्त के दिन टेस्ट शतक लगाने वाले भारत के पहले खिलाड़ी बन गए हैं. हालांकि उन्हें नंबर-3 पर खेलने का मौका इसलिए मिल पाया, क्योंकि साई सुदर्शन चोट के कारण सीरीज से बाहर हो गए थे. पूर्व क्रिकेटर संजय मांजरेकर का मानना है कि नंबर-3 पोजीशन के लिए पडिक्कल किसी वरदान से कम नहीं है. उनके पास स्पिन खेलने का कमाल का हुनर है.
गॉल में खेले जा रहे पहले टेस्ट के पहले दिन यशस्वी जायसवाल रन आउट हुए थे, जिसके बाद तीसरे नंबर पर देवदत्त पडिक्कल आए. उन्होंने स्पिन के खिलाफ शानदार खेल दिखाया, खराब गेंदों पर प्रहार किया तो अच्छी गेंदों को सम्मान भी दिया. उन्होंने पहले दिन 131 रन जड़कर भारत को मजबूत स्थिति में पहुंचाया. उनकी बल्लेबाजी में खास बात ये थी कि वह पूरे दिन नियंत्रण में दिखे, बैक-फुट पर शानदार खेल दिखाया. आगे बढ़कर शॉट और तेजी से दौड़ के साथ लगातार श्रीलंका के स्पिनर्स पर दबाव बनाते चले. संजय मांजरेकर ने उनकी बल्लेबाजी से खूब प्रभावित हुए, उन्होंने सोनी स्पोर्ट्स पर कहा कि ये सिलेक्शन बहुत अच्छा रहा है. पडिक्कल स्पिन के खिलाफ आसानी से खेलते हैं, डिफेन्स में भी अच्छे हैं और स्ट्राइक रोटेट करते रहने के साथ अटैकिंग शॉट भी खेलते हैं.
देवदत्त पडिक्कल की बैकफुट से अटैक करने की काबिलियत से मांजरेकर प्रभावित हुए, वह मानते हैं कि जहां गेंद ज्यादा टर्न होती है वहां ये जरुरी होता है. नजर आता है कि बल्लेबाज दबाव में नहीं है, बल्कि टर्न खेलने के लिए पूरी तरह तैयार और अपनी टाइमिंग और काबिलियत पर पूरा भरोसा रखता है.
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मांजरेकर ने कहा उनके पास ऐसी पिचों पर आगे बढ़कर साइट स्क्रीन के ऊपर से शॉट मारने की क्षमता भी है, इसलिए स्पिनर्स के लिए मददगार वाली पिचों पर साई सुदर्शन की वापसी के बाद भी नंबर-3 पर देवदत्त पडिक्कल को खिलाना चाहिए.
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देवदत्त पडिक्कल को लेकर संजय मांजरेकर ने एक्स पर एक पोस्ट करते हुए लिखा, "स्पिनरों के खिलाफ भारत के लिए देवदत्त पडिक्कल एक वरदान साबित हुए हैं. डिफेंस और अटैक, दोनों में उनकी तकनीक बेहतरीन है."
