नई दिल्लीः सुप्रीम कोर्ट के बीसीसीआई में ढांचागत सुधारों को लेकर जस्टिस आर एम लोढ़ा समिति की सिफारिशें को मंजूर करने के साथ ही बिहार क्रिकेट को नया जीवन मिल गया है. 15 साल से बीसीसीआई के दायरे से बाहर चल रहा बिहार क्रिकेट एसोशिएशन अब दूसरे क्रिकेट संघ की तरह वोट डालने और रणजी खेल सकेंगे.

 

बिहार के क्रिकेटर अब तक पड़ोसी राज्यों के भरोसे थे जहां उन्हें ज्यादा मौका नहीं मिला. लेकिन अब बिहार के क्रिकेटर रणजी खेल पाएंगे. 

 

राज्य का 'बिहार क्रिकेट एसोशिएशन' को सुप्रीम कोर्ट के द्वारा बीसीसीआई की मान्यता मिली है. हालाकि मान्यता मिलने के साथ ही राज्य के बोर्ड अध्यक्ष अब्दुल बारी सिद्दीकी को पद छोड़ना होगा क्योंकि लोढ़ा समीति में एक व्यक्ति एक पद का उल्लेख है. सिद्दकी बिहार सरकार में मंत्री हैं इसलिए उन्हें किसी एक पद को छोड़ना होगा. 

 

बीसीए के सचिव मृत्यूंजय तिवारी ने टाइम्स ऑफ इंडिया से बताया कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब बिहार क्रिकेट एक बार फिर पटरी पर लौटेगी. बिहार के क्रिकेटरों को अब दूसरे राज्यों के तरफ नहीं जाना होगा. बीसीसीआई के सदस्य बनने के बाद अब हमें शेयर भी मिलेगा इससे पचना का मोईन उल हक स्टेडियम भी बेहतर हो सकेगा.