ग्लासगो में 23 जुलाई से 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स शुरू हो गए हैं, जिसमें भारत के 125 खिलाड़ी 8 खेलों में देश का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं. लेकिन भारत के लिए चुनौती है कि रेसलिंग, हॉकी, बैडमिंटन समेत उन खेलों को इसमें शामिल नहीं किया गया है, जिसमें भारत ने पिछले कॉमनवेल्थ गेम्स में 30 मेडल जीते थे. बता दें कि कम खर्च में इवेंट को आयोजित करने के लिए खेलों की लिस्ट को छोटा कर दिया गया है. हालांकि एक समय था जब इसके आयोजन के रद्द होने का खतरा मंडरा रहा था.

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दरअसल जुलाई 2023 में विक्टोरिया राज्य ने अचानक मेजबानी अधिकार छोड़ दिया, क्योंकि अनुमानित लागत AUD 2.6 बिलियन से बढ़कर AUD 7 बिलियन तक पहुंच गई थी. ग्लासगो ने संकटमोचक की भूमिका निभाई, लेकिन अपनी सख्त और बिना किसी समझौते वाली शर्तों पर.

ग्लासगो में चल रहे कॉमनवेल्थ गेम्स का आयोजन बहुत भव्य नहीं है. 2026 का पूरा आयोजन लगभग £150 मिलियन के सीमित बजट पर हो रहा है. जिसका ज़्यादातर हिस्सा विक्टोरिया द्वारा आयोजन रद्द करने से मिले फ़ाइनेंशियल सेटलमेंट से आया है, और बाकी हिस्सा कमर्शियल रेवेन्यू से जुटाया गया.

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बता दें कि कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के लिए कोई नया पक्का निर्माण नहीं किया गया है, ये पूरी तरह 2014 से मौजूद वेन्यू पर निर्भर है. इस बार खिलाड़ियों के लिए कोई खास विलेज नहीं बनाया है, बल्कि वह लोकल होटल और यूनिवर्सिटी में ठहरे हैं. हर इवेंट को ग्लासगो में सिर्फ़ चार वेन्यू कॉम्प्लेक्स तक ही सीमित रखा गया है, जिससे शहरों के बीच महंगे ट्रांसपोर्ट नेटवर्क की ज़रूरत खत्म हो गई है.

भारत की मेडल टेली पर पड़ेगा असर

कई उन खेलों को हटा दिया गया है, जिसमें भारत के मेडल जीतने की उम्मीद बहुत ज्यादा रहती है. ग्लासगो के आयोजकों द्वारा ज्यादातर उन्ही खेलों को हटाया गया है, जिसमें भारत का दबदबा रहा है. बर्मिंघम (2022) में भारत ने 61 मेडल्स जीते थे, हमारा देश मेडल टेली में चौथे स्थान पर रहा था. इनमें से लगभग आधे (30 मेडल्स) उन खेलों से आए थे जो ग्लासगो 2026 में शामिल नहीं हैं.

रेसलिंग, हॉकी, बैडमिंटन और क्रिकेट को हटा दिया गया है. शूटिंग लगातार दूसरी बार शामिल नहीं है. क्या भारत इसका कोई विरोध दर्ज करवाएगा? हालांकि इतने खेलों के हटाने के बाद भी ग्लासगो में भारतीय दल में बड़े नाम वाले खिलाड़ी मौजूद हैं. कुछ खास खेलों और पैरा-टीमों पर सबकी नजरें टिकी हैं.