क्रिकेट में प्लेयर ऑफ द मैच का अवॉर्ड आमतौर पर उस खिलाड़ी को मिलता है जो बल्ले, गेंद या फील्डिंग से मैच का सबसे बड़ा असर छोड़ता है. लेकिन क्रिकेट इतिहास में एक ऐसा मुकाबला भी हुआ, जहां एक खिलाड़ी ने न रन बनाए, न विकेट लिया और न ही कोई कैच पकड़ा. इसके बावजूद वही मैच का सबसे बड़ा हीरो चुना गया.

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साल 2001 में वेस्टइंडीज और जिम्बाब्वे के बीच खेले गए एक वनडे मुकाबले ने क्रिकेट इतिहास में एक अनोखा रिकॉर्ड दर्ज किया. इस मैच में वेस्टइंडीज के तेज गेंदबाज कैमरन कफी को प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया, जबकि उनके नाम न कोई विकेट था, न कोई रन और न ही कोई कैच.

वेस्टइंडीज ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 50 ओवर में 5 विकेट पर 266 रन बनाए. टीम के लिए डैरेन गंगा, क्रिस गेल और शिवनारायण चंद्रपॉल ने अर्धशतकीय पारियां खेलीं. उस दौर में यह स्कोर काफी चुनौतीपूर्ण माना जाता था.

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लक्ष्य का पीछा करने उतरी जिम्बाब्वे की शुरुआत अच्छी नहीं रही, लेकिन मध्यक्रम के बल्लेबाजों ने संघर्ष करते हुए मुकाबले को रोमांचक बना दिया. एक समय ऐसा लग रहा था कि मैच आखिरी ओवरों तक जा सकता है.

इसी दौरान कैमरन कफी ने अपनी सटीक और कसी हुई गेंदबाजी से मुकाबले की दिशा बदल दी. उन्होंने अपने 10 ओवर के स्पेल में 2 मेडन डाले और सिर्फ 20 रन खर्च किए. हालांकि उन्हें एक भी विकेट नहीं मिला, लेकिन उनकी इकॉनमी ने जिम्बाब्वे के बल्लेबाजों पर इतना दबाव बना दिया कि टीम कभी भी जरूरी रन गति हासिल नहीं कर सकी.

दूसरी ओर मार्लोन सैमुअल्स और मर्विन डिलन ने तीन-तीन विकेट जरूर लिए, लेकिन उन्होंने कफी की तुलना में ज्यादा रन खर्च किए. कफी की कसी हुई गेंदबाजी ही वह वजह बनी, जिसने जिम्बाब्वे को 50 ओवर में 9 विकेट पर 239 रन तक सीमित रखा.

वेस्टइंडीज ने मुकाबला 27 रन से जीता और मैच के बाद प्लेयर ऑफ द मैच का अवॉर्ड कैमरन कफी को दिया गया. यह फैसला आज भी क्रिकेट इतिहास के सबसे अनोखे फैसलों में गिना जाता है.

कफी ने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में वेस्टइंडीज के लिए 15 टेस्ट और 41 वनडे मैच खेले. टेस्ट में उन्होंने 43 और वनडे में 41 विकेट लिए. हालांकि उनका करियर बहुत लंबा नहीं चला, लेकिन जिम्बाब्वे के खिलाफ खेला गया यह मुकाबला उन्हें हमेशा क्रिकेट इतिहास में खास पहचान दिलाता रहेगा.

क्रिकेट सिर्फ विकेट, रन और रिकॉर्ड का खेल नहीं है. कई बार मैच का असली फर्क उस खिलाड़ी से पड़ता है, जो स्कोरकार्ड में भले चमके नहीं, लेकिन विरोधी टीम की सांसें रोक देता है. कैमरन कफी की यह कहानी उसी बात का सबसे बड़ा उदाहरण है.

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