भारत की महिला क्रिकेट टीम ने हाल ही में इतिहास रच दिया. नवी मुंबई के डीवाई पाटिल स्टेडियम में साउथ अफ्रीका को 52 रनों से हराकर टीम इंडिया ने पहली बार महिला वर्ल्ड कप अपने नाम किया. इस जीत के बाद जहां पूरी टीम पर इनामों की बारिश हो रही है, वहीं अब चर्चा BCCI की सैलरी स्ट्रक्चर पर भी तेज हो गई है. आखिर भारतीय महिला खिलाड़ियों को कितना भुगतान किया जाता है और यह पुरुष टीम से कितना अलग है?

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BCCI का नया कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम

बीसीसीआई ने मार्च 2025 में Annual Player Retainership 2024–25 (Senior Women) जारी किया. इसमें खिलाड़ियों को उनके प्रदर्शन के आधार पर तीन ग्रेड में बांटा गया है. A, B और C.

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ग्रेड A - 50 लाख रुपये सालाना

इस कैटेगरी में तीन दिग्गज खिलाड़ी शामिल हैं- हरमनप्रीत कौर, स्मृति मंधाना और दीप्ति शर्मा. ये तीनों खिलाड़ी भारत की जीत की रीढ़ मानी जाती हैं.

ग्रेड B - 30 लाख रुपये सालाना

इस ग्रुप में चार खिलाड़ी शामिल हैं, रेणुका ठाकुर, जेमिमा रॉड्रिग्स, ऋचा घोष और शैफाली वर्मा.

ग्रेड C - 10 लाख रुपये सालाना 

इस कैटेगरी में कुल नौ खिलाड़ियों को शामिल किया गया हैं, जिनमें राधा यादव, अमनजोत कौर, उमा छेत्री और स्नेह राणा जैसे नाम शामिल हैं.

मैच फीस में समानता, लेकिन मौके कम

महिला और पुरुष खिलाड़ियों की अब प्रति मैच एक समान फीस दी जाती  है, 

टेस्ट मैच: 15 लाख रुपये

वनडे: 6 लाख रुपये

टी20: 3 लाख रुपये

यह बदलाव BCCI ने साल 2023 में लागू किया था, ताकि जेंडर आधारित वेतन असमानता खत्म की जा सके और एक जैसी सैलेरी मिले . हालांकि, एक बड़ा फर्क अब भी बाकी है. महिला टीम के मुकाबले पुरुष टीम कई गुना ज्यादा मैच खेलती है, जिससे उनकी कुल कमाई काफी बढ़ जाती है.

पुरुष टीम का सैलरी स्ट्रक्चर

बीसीसीआई ने अप्रैल 2025 में Senior Men’s Annual Player Retainership 2024–25 जारी किया. इसमें खिलाड़ियों को चार ग्रेड में बांटा गया है.

ग्रेड A प्लस : 7 करोड़ रुये (विराट कोहली, रोहित शर्मा, जसप्रीत बुमराह जैसे दिग्गज शामिल)

ग्रेड A : 5 करोड़ रुपये

ग्रेड B : 3 करोड़ रुपये

ग्रेड C : 1 करोड़ रुपये

स्पष्ट है कि पुरुष खिलाड़ियों की सैलरी महिला खिलाड़ियों से कई गुना अधिक है, हालांकि दोनों की मैच फीस अब समान रखी गई है.

वर्ल्ड कप जीत के बाद बढ़ी उम्मीदें

वर्ल्ड कप जीत के बाद महिला क्रिकेट की लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है. फैंस और एक्सपर्ट्स दोनों की राय है कि अब समय आ गया है जब महिला खिलाड़ियों की सैलरी को भी उनके योगदान के हिसाब से बढ़ाया जाए.