अस्मिता डे और हर्ष सिंह ने जूडो में गोल्ड मेडल जीतकर  इतिहास रच दिया है. इससे पहले कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में कोई भी भारतीय जूडो एथलीट गोल्ड मेडल नहीं जीत पाया था. अस्मिता ने महिलाओं की 48 किलोग्राम वर्ग प्रतियोगिता के फाइनल में कनाडा की एथलीट को हराया. दूसरी ओर हर्ष सिंह नए पुरुषों की 60 किलोग्राम वर्ग में ऑस्ट्रेलिया के एथलीट को हराकर इतिहास रच दिया.

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भारत नए पहली बार कॉमनवेल्थ गेम्स में भाग 1934 में लिया था. 92 साल बीत चुके थे, लेकिन जूडो में भारत को कोई गोल्ड मेडल नहीं मिल पाया था. यह गोल्ड मेडल का सूखा अस्मिता डे नए समाप्त किया, जिन्होंनने फाइनल में कनाडा की हाइडी क्वाच को हराया. उनका मुकाबला फुल टाइम तक बराबरी पर था, जिसके बाद एक्स्ट्रा टाइम का सहारा लिया गया. एक्स्ट्रा टाइम में जो भी एथलीट पहले स्कोर करता है, उसे जीता हुआ माना जाता है. अस्मिता ने एक्स्ट्रा टाइम में पहले स्कोर करते हुए ऐतिहासिक जीत दर्ज की.

वहीं हर्ष सिंह ने फाइनल में ऑस्ट्रेलिया के जोशुआ काट्ज को बेहद आसानी से 10-0 के अंतर से हराया. वे कॉमनवेल्थ गेम्स में जूडो में गोल्ड मेडल जीतने वाले भारत के पहले पुरुष एथलीट बने हैं. 

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भारत के पास 5 गोल्ड मेडल

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 की मेडल टेबल में भारत के गोल्ड मेडलों की संख्या 5 हो गई है. भारत अब पदक तालिका में आठवें नंबर पर आ गया है. भारत के नाम अभी 5 गोल्ड मेडल, 10 सिल्वर और 4 ब्रॉन्ज मेडल हैं. अस्मिता और हर्ष के बाद भारत को यामिनी मौर्य से भी जूडो में गोल्ड मेडल की उम्मीद है. यामिनी को महिलाओं की 57 किलोग्राम वर्ग प्रतियोगिता के फाइनल में इंग्लैंड की एसिला टोपराक से भिड़ना है.

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