ट्रेन टिकट बुक करने से पहले जरूर पता होनी चाहिए ये 7 बातें, जानें पूरी डिटेल्स
RAC यानी Reservation Against Cancellation. इसका मतलब आपके पास सीट तो होती है. लेकिन पूरा बर्थ कन्फर्म नहीं होता. आप ट्रेन में सफर कर सकते हैं और बैठने की जगह मिलती है. अगर कोई यात्री टिकट कैंसिल करता है. तो RAC कन्फर्म बर्थ में बदल सकता है.
GNWL यानी General Waiting List. यह सबसे कॉमन वेटिंग कैटेगरी है, जो ट्रेन के शुरुआती स्टेशन से बुकिंग पर मिलती है. GNWL टिकट के कन्फर्म होने की संभावना बाकी वेटिंग लिस्ट से ज्यादा होती है. अगर टिकट पहले बुक किया गया हो. जल्दी बुकिंग यहां सबसे बड़ा फायदा देती है.
Tatkal कोटे से टिकट बुक करने पर अगर सीट कन्फर्म नहीं होती. तो स्टेटस बनता है TQWL. इसमें कन्फर्मेशन की संभावना GNWL से कम रहती है, क्योंकि तात्काल कोटे की सीटें सीमित होती हैं. अगर चार्ट बनने तक टिकट कन्फर्म नहीं हुआ, तो वह अपने आप कैंसिल होकर रिफंड हो जाता है.
UTS यानी Unreserved Ticketing System. यह जनरल टिकट सिस्टम है. जिसमें बिना रिजर्वेशन यात्रा की जाती है. यह टिकट काउंटर या मोबाइल ऐप से मिल जाते हैं और ज्यादातर शॉर्ट डिस्टेंस ट्रैवल के लिए इस्तेमाल होते हैं.
E-Catering सर्विस सफर के दौरान अपनी सीट पर पसंद का खाना मंगवाना के काम आती है. IRCTC की वेबसाइट या ऐप से आप अलग-अलग रेस्टोरेंट से फूड ऑर्डर कर सकते हैं. बड़े स्टेशनों पर ट्रेन पहुंचते ही खाना आपकी सीट तक डिलीवर किया जाता है.
LHB कोच जर्मन टेक्नोलॉजी पर बने आधुनिक डिब्बे होते हैं. यह पुराने ICF कोच के मुकाबले ज्यादा सेफ, तेज और आरामदायक माने जाते हैं. सफर के दौरान झटके कम लगते हैं और आवाज भी कम होती है. आज ज्यादातर प्रीमियम ट्रेनें LHB कोच के साथ ही चलाई जा रही हैं.
विकल्प स्कीम के तहत अगर आपकी ट्रेन वेटिंग में रह जाती है. तो रेलवे आपको किसी दूसरी ट्रेन में सीट ऑफर कर सकता है. इसके लिए कोई एक्स्ट्रा चार्ज नहीं लगता. भले ट्रेन बदल जाए, लेकिन सफर का रास्ता खुला रहता है. फ्लेक्सिबल यात्रियों के लिए यह स्कीम काफी राहत देती है.