स्मार्ट लॉक बना खतरा? इंदौर हादसे के बाद डिजिटल डोर लॉक यूज़ करने से पहले जान लें ये जरूरी बातें

हाल ही में इंदौर में हुए एक दर्दनाक हादसे ने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है. एक घर में आग लगने के दौरान दरवाजा समय पर नहीं खुल पाया, और अंदर फंसे 8 लोगों की जान चली गई. शुरुआती जानकारी में स्मार्ट लॉक को एक वजह माना जा रहा है. जिससे सुरक्षा पर सवाल खड़े हो गए हैं.
आजकल डिजिटल डोर लॉक तेजी से घरों में लग रहे हैं. लोग इसे सुरक्षित और आसान विकल्प मानते हैं, क्योंकि इसमें चाबी की जरूरत नहीं होती. पासवर्ड, फिंगरप्रिंट या मोबाइल से दरवाजा खुल जाता है. लेकिन इमरजेंसी के समय यही सुविधा परेशानी बन सकती है. अगर बैकअप सिस्टम सही से काम न करे या यूजर को सही जानकारी न हो.
स्मार्ट लॉक आमतौर पर बिजली या बैटरी से चलता है. अगर आग जैसी स्थिति में सिस्टम फेल हो जाए या बैटरी खत्म हो. तो दरवाजा खोलना मुश्किल हो सकता है. कई बार लोग मैकेनिकल की का इस्तेमाल करना नहीं जानते. यही वजह है कि ऐसी टेक्नोलॉजी के साथ बेसिक सेफ्टी समझना बेहद जरूरी हो जाता है.
खरीदते समय कुछ जरूरी फीचर्स पर ध्यान देना बहुत जरूरी है. जैसे मैकेनिकल की बैकअप, लो बैटरी अलर्ट और अंदर से आसानी से खुलने वाला सिस्टम. कुछ लॉक ऐसे भी आते हैं जो ज्यादा गर्मी या धुएं में ऑटो अनलॉक हो जाते हैं. ऐसे फीचर्स इमरजेंसी में बहुत काम आते हैं और बड़ा खतरा टाल सकते हैं.
इसके अलावा इंस्टॉलेशन भी सही तरीके से होना चाहिए. अगर लॉक ठीक से फिट नहीं किया गया या दरवाजे के साथ सही मैच नहीं करता, तो परेशानी बढ़ सकती है. हमेशा किसी प्रोफेशनल से इंस्टॉलेशन करवाना बेहतर रहता है, जिससे जरूरत के समय लॉक सही तरीके से काम करे और फंसे नहीं.
घर के सभी लोगों को डिजिटल डोर लॉक इस्तेमाल करने की जानकारी होनी चाहिए. खासकर बच्चों और बुजुर्गों को इमरजेंसी में दरवाजा खोलना सिखाना जरूरी है. सिर्फ एक व्यक्ति पर निर्भर रहना सही नहीं है. पासकोड के साथ साथ मैकेनिकल चाबी की लोकेशन भी सभी को पता होनी चाहिए.
टेक्नोलॉजी सुविधा देती है. लेकिन आंख बंद करके भरोसा करना सही नहीं होता. स्मार्ट लॉक इस्तेमाल करते समय समय समय पर बैटरी चेक करना, सिस्टम अपडेट रखना और किसी भी खराबी को नजरअंदाज न करना जरूरी है. थोड़ी सी सावधानी आपकी और आपके परिवार की सेफ्टी को काफी हद तक बेहतर बना सकती है.