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रात होते ही भारतीय रेलवे में लागू हो जाते हैं ये नियम, सफर पर निकलने से पहले लीजिए जान

कविता गाडरी   |  03 Mar 2026 09:50 AM (IST)
रात होते ही भारतीय रेलवे में लागू हो जाते हैं ये नियम, सफर पर निकलने से पहले लीजिए जान

भारतीय रेलवे देश की सबसे बड़ी परिवहन सेवाओं में से एक है. रोजाना हजारों-लाखों इससे यात्री से सफर करते हैं. वहीं लंबी दूरी की यात्रा में रात का समय बहुत जरूरी माना जाता है. क्योंकि ज्यादातर यात्री इस दौरान आराम करना चाहते हैं. इसके अलावा यात्रियों की सुविधा, सुरक्षा और आराम को ध्यान में रखते हुए भारतीय रेलवे ने रात 10 बजे के बाद कुछ खास नियम लागू कर रखे हैं. इन नियमों का मकसद यह है कि हर यात्री को शांत और सुरक्षित माहौल मिले. ऐसे में अगर आप भी रात में ट्रेन से सफर करने वाले हैं तो इन नियमों की जानकारी होना जरूरी है. ताकि यात्रा के दौरान किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं की रात होते ही भारतीय रेलवे में कौन से नियम लागू हो जाते हैं और सफर पर निकलने से पहले आपको कौन से नियम जानना जरूरी है.

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रेलवे के नियमों के अनुसार रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक सो रहे यात्रियों को टिकट दिखाने के लिए परेशान नहीं कर सकता है. यह नियम स्लीपर और एसी दोनों कोच पर लागू होते हैं.

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हालांकि अगर जो यात्री रात 10 बजे के बाद ट्रेन में चढ़ते हैं, उनसे टिकट की जांच की जा सकती है. अगर कोई अधिकारी बिना वजह बार-बार परेशान करता है तो हेल्पलाइन नंबर 139 पर शिकायत दर्ज कर सकते हैं.

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इसके अलावा रात के समय ट्रेन में शांति बनाए रखना भी जरूरी होता है. तेज आवाज में बातचीत करना, मोबाइल पर लाउडस्पीकर चलाना या बिना हेडफोन के गाने सुनना नियमों के खिलाफ माना जाता है.

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अगर किसी यात्री की वजह से दूसरों को परेशानी होती है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है. रेलवे एक्ट 1989 की धारा 145 के तहत शांति भंग करने पर 500 से 1000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है.

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रात 10 बजे के बाद कोच की मुख्य लाइट बंद कर दी जाती है और केवल नाइट लाइट चालू रहती है, ताकि यात्री आराम से सो सके. ऐसे में ग्रुप में यात्रा कर रहे लोग ऊंची आवाज में बातचीत नहीं कर सकते हैं.

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इसके अलावा कुछ ट्रेनों में देर रात खाने की सेवा बंद कर दी जाती है. जरूरत होने पर यात्री पहले से खाना बुक कर सकते हैं. वही रात में सफाई कर्मचारियों की आवाजाही भी सीमित कर दी जाती है, ताकि यात्रियों को नींद में दिक्कत न हो.

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कई ट्रेनों में सुरक्षा कारणों से रात 11 बजे से सुबह 5 बजे तक चार्जिंग पॉइंट भी बंद रहते हैं, ताकि शॉर्ट सर्किट जैसी घटनाओं से बचा जा सके.

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वहीं स्लीपर कोच में रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक ही मिडिल बर्थ वाला यात्री अपनी सीट खोल सकता है. इस दौरान लोअर बर्थ पर बैठे यात्री उसे रोक नहीं सकते हैं. लेकिन सुबह 6 बजे के बाद मिडिल बर्थ को वापस बंद करना होता है, ताकि नीचे बैठे यात्रियों को सुविधा मिल सके.

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