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अगर मकान किराए पर देने वाले हैं, तो पहले इन 3 बातों को क्लियर कर लें, वरना बाद में परेशानी होगी

नीलेश ओझा   |  18 Mar 2026 03:10 PM (IST)
अगर मकान किराए पर देने वाले हैं, तो पहले इन 3 बातों को क्लियर कर लें, वरना बाद में परेशानी होगी

आज के समय में अपना घर होना हर किसी के बस की बात नहीं है. प्रॉपर्टी के दाम जिस तरह बढ़ रहे हैं, उससे ज्यादातर लोग किराए पर रहना ही चुनते हैं. यही वजह है कि हर शहर में किराएदार आसानी से मिल जाते हैं. लेकिन मकान किराए पर देना जितना आसान लगता है. उतना होता नहीं.

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आजकल लोग नौकरी, पढ़ाई या काम के चलते अक्सर शहर बदलते रहते हैं. ऐसे में किराए का घर उनकी पहली जरूरत बन जाता है. मकान मालिक के लिए यह कमाई का अच्छा जरिया हो सकता है. लेकिन थोड़ा सावधान रहना जरूरी है. सिर्फ भरोसे पर घर दे देना सही नहीं होता.

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कुछ बेसिक नियम फॉलो करेंगे तो आगे चलकर कोई झंझट नहीं होगी और सब कुछ स्मूद रहेगा. सबसे पहले बात आती है पुलिस वेरिफिकेशन की. इसे हल्के में लेना बड़ी गलती हो सकती है. आपको किराएदार की पहचान से जुड़े डॉक्यूमेंट जरूर लेने चाहिए. जैसे आधार कार्ड वगैरह. इसके बाद पुलिस वेरिफिकेशन कराना जरूरी होता है.

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इसके बाद जो जरूरी चीज है वह है रेंट एग्रीमेंट. सिर्फ बोलकर किराया तय करना बाद में दिक्कत दे सकता है. इसलिए हमेशा लिखित एग्रीमेंट बनवाना चाहिए. आमतौर पर 11 महीने का एग्रीमेंट किया जाता है. इसमें किराया कितना होगा, कब बढ़ेगा, नोटिस पीरियड क्या रहेगा. यह सब साफ लिखा होना चाहिए.

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तो तीसरी जरूरी बात है सिक्योरिटी अमाउंट. कई लोग इसे इग्नोर कर देते हैं. लेकिन यह काफी काम की चीज होती है. कम से कम 1 या 2 महीने का डिपॉजिट जरूर लें. अगर किराएदार अचानक घर खाली कर दे या किराया न दे. तो यही पैसा आपकी मदद करता है. इससे आपका नुकसान काफी हद तक कवर हो जाता है.

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अगर आप यह तीनों चीजें पहले ही क्लियर कर लेते हैं. तो आगे कोई बड़ी परेशानी नहीं आती. छोटी-छोटी सावधानियां ही बड़े झंझट से बचाती हैं. इसलिए जल्दबाजी में फैसला लेने से बेहतर है कि थोड़ा समय लेकर सही तरीके से सब कुछ तय करें.

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मकान किराए पर देना सिर्फ कमाई नहीं जिम्मेदारी भी है. सही किराएदार चुनना और जरूरी नियम फॉलो करना ही आपको सेफ रखता है. अगर शुरुआत में सही तरीके अपनाए गए तो आगे सब कुछ आसान रहेगा और आपको बार-बार टेंशन लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी.

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