उरी: शहीद को सलाम, यहां तफसील से दी गई है 17 शहीदों के बारे में जानकारी
Symbolic image: 15. लांस नायक आरके यादव: बलिया, यूपी
Symbolic image: 11. सिपाही जावरा मुंडा: खूंटी, झारखंड.
17. सिपाही गणेश शंकर: संत कबीर नगर, यूपी
16. हवलदार एनएस रावत: राजसमंद, राजस्थान
14. सिपाही जी दलाई: हावड़ा, वेस्ट बंगाल
13. सिपाही विश्वजीत गोराई : द. 24 परगना, वेस्ट बंगाल. उरी में आतंकियों की कायराना हरकतों में शहीद हुए दक्षिण 24 परगना के विश्वजीत गोराई के परिवार तो मुसीबतों का पहाड़ ही टूट पड़ा है. 20 साल के गोराई के पिता दैनिक मजदूरी कर के अपना घर चलाते रहे हैं. विश्वजीत की यह पहली ही पोस्टिंग थी. उसके बाद अब मजदूरी करने वाले पिता ही एक मात्र कमाने वाले शख्स उसके परिवार में बचे हैं. जिस समय खबर वहां पहुंची लोग स्तब्ध हो गए. क्योंकि, बेटे की सेना में नौकरी लगने की खुशी अभी चल ही रही थी कि इतने बड़े मातम की खबर आ गई. उसके परिवार के सभी सपने टूट गए. शहीद के घर के पास काफी लोग जुटे थे. सभी शहीद को सलाम कर रहे थे लेकिन, परिवार को लेकर वे दुखी थे.
12. सिपाही नायमन कुजूर: गुमला, झारखंड
10. सिपाही राकेश सिंह: कैमूर, बिहार
9. सिपाही राजेश कुमार सिंह: जौनपुर, यूपी
8. हवलदार अशोक कुमार: आरा, बिहार- बिहार के आरा के रहने वाले अशोक कुमार सिंह के घर का हाल भी कुछ ऐसा ही था. हवलदार अशोक सिंह के दो बच्चे हैं. उनमें से एक बिहार रेजीमेंट में ही देश की सेवा में लगा है जबकि दूसरा अभी पढ़ाई कर रहा है. बाप के शहीद होने के बाद भी बेटे के जज्बे में कोई कमी नहीं है. वह अभी भी दुश्मनों के दांत खट्टे कर देने के लिए काफी है. आसपास के गांवों से भी लोग खबर सुनकर वहां की ओर रुख कर गए. गांव को लोग तो वहां जुटे ही थे लेकिन, आसपास के गांव को लोग भी पहुंच गए. सभी का एक ही सुर में कहना था कि अब पाकिस्तान को करारा जवाब मिलना चाहिए. साथ ही लोग अपील कर रहे थे कि पाक में घुसकर आतंकियों को मारे भारत सरकार.
7. सिपाही टीएस सोमनाथ: नासिक, महाराष्ट्र- नासिक के रहने वाले शहीद संदीप सोमनाथ ठोक बिहार रेजीमेंट में थे. 25 साल के संदीप के शहीद होने की सूचना जब वहां पहुंची तो सभी सन्न थे. वे नासिक के सिन्नर तहसील के खडांगली गांव के रहने वाले थे. उनकी शादी नहीं हुई थी लेकिन उसके लिए परिजन तैयारियों में जरूर लगे थे. पर, मातम वाली इस खबर ने न सिर्फ उनके परिवार को बल्कि पूरे इलाके को गमगीन कर दिया. सभी ने धैर्य खो दिया और कातिलों को कोसते रहे. दो बहनों और एक भाई के अलावा पूरा घर बेसुध पड़ा हुआ था. गांव का बच्चा-बच्चा तक समझ गया था कि आखिर हुआ क्या है. और सबके मुंह पर एक ही सवाल था कि भारत क्या करेगा?
6. सिपाही हरिंदर यावद: गाजीपुर, यूपी- छह भाइयों में पांचवें स्थान पर थे शहीद हरिंदर यादव. इस बहादुर के शहीद होने की कहानी तो गांव वालों के लिए बहुत बड़ा झटका है. क्योंकि, इसकी बहादुरी के किस्से सरहदों तक ही सीमित नहीं थे. वह गांव में भी हीरो था. उसने गांव में भी ऐसी बहादुरी दिखाई थी कि लोग उसके कायल हो गए थे. पिछली होली को गांव के एक घर में आग लगी थी हरिंदर ने बिना कोई प्रवाह किये उसमें घुस कर 8 साल के बच्चे को निकाला था. उसकी जान बचाई थी. उनकी पत्नी को काफी देर तक उसके बारे में नहीं बताया गया और सभी को रोका जा रहा था. शहीद की चोट पूरे गांव को लगी है.
5. लांस नायक जी शंकर: सतारा, महाराष्ट्र- सतारा लांस नायक जी शंकर के गांव में भी सैकड़ों लोगों की भीड़ लगी है. ज्यादातर लोगों को टीवी के जरिए उनके शहीद होने की खबर लगी थी. जबकि, परिजनों को पहले ही सूचना दे दी गई थी. रोने की आवाज सुनकर जब पड़ोसी पहुंचे तो वो भी सन्न हो गए. सभी लोगो ने शहीद को श्रद्धांजलि दी है. सातारा के माण तहसील के जाशी गाव के रहनेवाले शहीद लान्सनायक चंद्रकांत शंकर गलांडे की उम्र अभी 27 साल थी. उनकी पत्नी के अलावा घर में दो बच्चें भी हैं. बच्चों की उम्र काफी छोटी है और उनके सामने एक बड़ी मुसीबत है. गांव के लोग भी शहीद को सलाम करने में लगे हैं.
4. नायक एसके विद्यार्थी: गया, बिहार- गया में नायक एसके विद्यार्थी के परिवार के लिए भी यह खबर बड़े हादसे की तरह पहुंची. पहले तो किसी को भरोसा ही नहीं हुआ लेकिन समय बीतते-बीतते खबर पुख्ता होती चली गई. फिर हर तरफ रोने की आवाजें ही थी. लोगों का जुटना भी शुरू हो गया था. विद्यार्थी के परिवार में उनकी मां के अलावा चार बच्चे और पत्नी हैं. करीब 16 साल पहले उनकी शादी हुई थी. दुर्गा पूजा में आने के लिये उनकी बच्चों से बात हुयी थी. जम्मू के उरी में शहीद हुए जवान गया के परैया थाना के बोकनारी गांव के रहने वाले थे.
3. सिपाही उईके जनराव: अमरावती, महाराष्ट्र- अमरावती के रहने वाले शहीद पंजाब जानराव उईके के घर भी यह खबर मातम का संदेश बन गई. पलक झपके ही मातम पूरे गांव में फैल गया. लेकिन, उनके परिवार के कुछ सदस्यों को इस बारे में कुछ बताया ही नहीं गया. कुछ लोग खबर को अफवाह बताते भी नजर आएं शायद उम्मीद थी कि खबर झूठी निकल जाए. उईके की अभी शादी नहीं हुई थी लेकिन मां-बाप के बुढ़ापे की वह उम्मीद था. अपने पिता की तरह देश के लिए मरने की कसम उसने बचपन में ही खा ली थी. उसके पिता जानराव भी सेना में थे और देश की सेवा की थी. पूरे गांव को लोग इस हालात में उनके साथ खड़े हैं.
2. हवलदार रवि पाल: सांबा, जम्मू (जम्मू-कश्मीर) रविवार को श्रीनगर के उरी में सेना के कैंप पर हुए हमले में जम्मू के साम्बा सेक्टर के हवलदार रवि पॉल ने भी अपने प्राणों की आहुति दे दी. रवि पॉल के परिजन अब सरकार को आतंकवाद से निपटने के लिए सेना को पूरे अधिकार देने की मांग कर रहे है. जम्मू के साम्बा सेक्टर के सर्वा गांव में 10 डोगरा यूनिट के हवलदार रवि पॉल के घर रविवार शाम से ही उनके गांववालों, परिजनों और दोस्तों का ताँता लगा हुआ है और लोग इस शहीद की शहादत को नम आँखों से श्रधांजलि दे रहे है. 43 साल के रवि पॉल 23 साल से सेना में है. उनके घर में उनके 4 भाई, माँ, पत्नी और 2 बेटे है.
उरी हमले शहीद हुए जवान देश के अलग-अलग हिस्सों से आकर सीमा की रक्षा में लगे थे. उन्हें भाषा पर विवाद नहीं था, वो जातिवाद के शिकार भी नहीं थे. उन्हें सिर्फ तिरंगा प्यारा था और वे देश के लिए लड़ते हुए शहीद हो गए. देश के हर नागरिक को उन वीर सपूतों पर नाज है. इस खबर में हम आपको शहीदों के बारे में बताने जा रहे हैं. शहीद 17 जवानों में से दो डोगरा रेजीमेंट और 15 बिहार रेजीमेंट हैं. डोगरा रेजिमेंट वाले जवान जम्मू कश्मीर के रहने वाले थे . जबकि बिहार रेजिमेंट के शहीद जवानों में 4 यूपी, 3 बिहार, 3 महाराष्ट्र, 2 झारखंड, 2 पश्चिम बंगाल और 1 राजस्थान के थे. घायल हुए जवान भी अलग-अलग हिस्सों से हैं. शहीद जवानों के नाम इस प्रकार हैं. 1. सुबेदार करनैल सिंह: बिशना, जम्मू (जम्मू-कश्मीर) जम्मू के बिश्नाह इलाके के शिबूचक के रहने वाले करनैल सिंह पिछले करीब ढाई सालों से उरी में तैनात थे. अब उनकी यूनिट अगले महीने पठानकोट जानी थी जिसके लिए एडवांस पार्टी पठानकोट पहुंच चुकी थी. उनके पठानकोट जाने से पहले वो छुट्टी लेकर कुछ दिनों के लिए घर आना चाहते थे. करनैल सिंह की इस शहादत से पूरा शिबूचक गांव सदमे में है. जैसे ही उनकी शहादत की खबर उनके गांव पहुंची तो पूरा गांव इस दुःख के समय उनके घर जा पहुंचा. पूरे गांव में किसी ने रोटी नहीं बनायीं और सरकार से मांग की कि अब पाकिस्तान के खिलाफ सख्त कदम की ज़रुरत है.