ज्यादा टीवी देखने से हो सकती है मौत, ऐसी ही10 खबरें जो जला देंगी आपके दिमाग की बत्ती!
उत्तराखंड सरकार अब रामचरित मानस वाली संजीवनी बूटी की खोज करेगी. प्रदेश के मुख्यमंत्री हरीश रावत ने तीन विशेषज्ञों के साथ मीटिंग कर इस प्रोजेक्ट को हरी झंडी दे दी है. इस प्रोजेक्ट के लिए 25 करोड़ रुपए का बजट भी दिया गया है. (सभी तस्वीरें प्रतीकात्मक हैं)
एक चौथाई कप शहद में एक चौथाई कप सिरका मिला लें. फिर दिन में छह बार चाय के चम्मच बराबर खाते रहें इससे आपके शरीर में बैक्टेरिया कमजोर होंगे और आप स्वस्थ्य रहेंगे.
कॉफी के शौकीन अगर दांत में उसके निशान और मुंह में उसकी बदबू से परेशान रहते हैं तो अब इस परेशानी को एक दूर स्ट्रॉ कर सकता है. अगर आप स्ट्रॉ से कॉफी पिएं तो दांत कॉफी के संपर्क में कम आएंगे और कॉफी को मुंह में रहने का वक्त भी कम मिलेगा और बदबू भी नहीं आएगी.
2040 तक कंप्यूटर चिप दुनिया की पूरी बिजली खा जाएगीं. अगर जल्द कंप्यूटर हार्डवेयर निर्माण तकनीकी में बदलाव नहीं हुआ तो 2040 तक दुनिया की सारी बिजली कंप्यूटरों को चलाने भर के लिए पर्याप्त नहीं होगी.
खाने के बाद एक टुकड़ा चीज़ आपके दांतों को एसिड के अटैक से बचाता है और स्वस्थ्य रखता है. एक रिसर्च के मुताबिक जब आप खाना चबाते हैं तो रोटी, मिठाई, खट्टी चीजों और सिरके आदि से एसिड निकलता है. पर दांतों पर चढ़ी किसी चीज़ की परत इसके नुकसान से दांतों को बचा लेती है.
देश के 50 फीसदी लोग टूथब्रश से दांत साफ नहीं करते हैं. हैरान करने वाली बात ये है कि 95 फीसदी लोग दांतों की बीमारी से पीड़ित है. 15 वर्ष से कम आयु के 70 फीसदी बच्चों के दांतों में गड्ढे हैं. ये दावा इंडियन डेंटल एसोसिएशन ने एक रिसर्च में किया है.
आठ घंटे से ज्यादा बैठकर काम करने वाली नौकरी आपकी जान ले सकती है. एक बड़ी रिसर्च के मुताबिक लगातार बैठकर काम करने से शऱीर की मशीनरी के काम करने का तरीका गड़बड़ हो जाता है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि लंबे समय तक बैठने से खून के प्रवाह में दिक्कत आती है और दिल की बीमारी की आशंका बढ़ जाती है.
जापान में हुई एक रिसर्च के मुताबिक ज्यादा टीवी देखने से फेफड़े में खून का थक्का जमने की आशंका बढ़ जाती है. देर तक टीवी देखने वाले लोग आलसी हो जाते हैं जो कि व्यक्ति की फिटनेस को कम करता है.
पानी में रहने के बावजूद मेढ़क मुंह से पानी नहीं पीता है. मेढ़क त्वचा से पानी सोख लेता है. जिससे उसके शरीर में साफ और छना हुआ पानी पहुंचता है. मेढक के जिंदा रहने के लिए ऑक्सीजन की सप्लाई भी उसकी त्वचा से ही होती है.
ज्यादा और लंबी नींद लेने वाले डिप्रेशन का शिकार ज्यादा आसानी से हो सकते हैं. यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया के क्लीनिकल प्रोफेसर डेविड हिलमैन ने ये दावा किया है कि ज्यादा सोने की बीमारी स्लीप एपनिया के लक्षण भी डिप्रेशन वाले ही होते हैं.