रोने के लिए यहां रोज इकट्ठा होते हैं लोग, जानें क्या खास बात है इस क्लब की
इस क्लब के फाउंडिंग मेंबर्स जिनमें साइकैट्रिक्स भी मौजूद हैं, का कहना है कि ये बहुत ही अच्छी बात है कि लोगों को यहां रोजाना रोने के लिए प्रेरित किया जाता है.
एक्सपर्ट ये भी कहते हैं कि रोना उन लोगों के लिए भी अच्छा है जो अपने इमोशंस शेयर नहीं कर पाते.
वहीं एक्सपर्ट कहते हैं कि रोना एक हेल्दी एक्सरसाइज है जो कि स्ट्रेस से दूर रखता है और आपको हल्का महसूस करवाता है.
3000 लोगों पर दुनियाभर में की गई एक रिसर्च में ये बात सामने आई थी कि रोने से लोगों का मूड बेहतर होता है. इस रिसर्च में देखा गया था कि मरीज रोने के बाद काफी राहत महसूस कर रहे थे.
सूरत के इस क्लब में सैकड़ों की संख्या में रोजाना लोग आते हैं. यहां के प्रवक्ता का कहना है कि हमारी उम्मीद से अधिक लोग यहां आने लगे हैं. यहां आकर बहुत से लोग अपनी जिंदगी के गमों के बारे में बात करते हैं और रोते हैं.
इस क्लब के बोर्ड मेंबर के मुताबिक, यदि आंसुओं के जरिए लोगों की बॉडी से नुकसान पहुंचाने वाले हार्मोन कोर्टिसोल बाहर आता है तो अच्छी बात है. ये हार्मोन यदि शरीर में लंबे समय तक रहता है तो ये ना सिर्फ शरीर को नुकसान पहुंचाता है बल्कि स्ट्रेस, टेंशन और डिप्रेशन का कारण भी बनता है.
इस क्लब में लोग आकर अपनी लाइफ के बारे में बात करके अपने इमोशंस बाहर निकालते हैं और रोते हैं.इससे ये लोग स्ट्रेस फ्री होते हैं.
आपने लाफ्टर क्लब और स्माइल थेरेपी के बारे में तो खूब सुना होगा लेकिन सूरत में ये क्राइंग क्लब अपने आप में अनोखा है.
बचपन से ही हर किसी को सिखाया जाता है कि रोना बुरी बात है. बच्चों को कम रोना ज्यादा हंसना सिखाया जाता है. रोने को बुरा समझा जाता है लेकिन क्या आप जानते हैं रोना भी फायदेमंद हो सकता है. जी हां, इसी धारणा को आधार बनाते हुए एक क्लब बनाया गया है. सभी फोटोः गेटी इमेज