नया फोन भी कुछ महीनों में क्यों पड़ जाता है धीमा? जानें टेक्निकल वजह

नया स्मार्टफोन हाथ में आते ही उसकी स्पीड सबसे ज्यादा महसूस होती है. ऐप तुरंत खुलते हैं, स्क्रीन पर स्क्रॉलिंग स्मूद रहती है और एक साथ कई काम करने में भी परेशानी नहीं होती है, लेकिन कुछ समय बाद यही फोन पहले जैसा तेज महसूस नहीं होता. ऐप खुलने में ज्यादा वक्त लग सकता है, मल्टीटास्किंग में दिक्कत आने लगती है और कभी-कभी फोन अटकता भी है. इसका मतलब हमेशा यह नहीं होता कि फोन खराब हो गया है. स्टोरेज, बैटरी, गर्मी और सॉफ्टवेयर से जुड़ी कई चीजें मिलकर इसकी परफॉर्मेंस पर असर डाल सकती हैं.
जब फोन की स्टोरेज करीब 85-95 फीसदी तक भर जाती है, तो टेंपरेरी फाइल्स बनाने, कैश संभालने और वर्चुअल मेमोरी मैनेज करने के लिए कम जगह बचती है. इसका असर ऑपरेटिंग सिस्टम की स्पीड पर पड़ सकता है. इसलिए स्टोरेज में करीब 10-15 फीसदी जगह खाली रखना बेहतर है.
भारी काम करने पर फोन की चिप्स गर्मी पैदा करती हैं. तापमान एक सीमा से ऊपर जाने पर सिस्टम प्रोसेसर की क्लॉक स्पीड कम कर देता है, जिससे हार्डवेयर को ज्यादा गर्मी से नुकसान न पहुंचे. इसी वजह से फोन की प्रोसेसिंग धीमी महसूस हो सकती है.
समय के साथ बैटरी की क्षमता कम होती है और वह पहले जैसी पीक पावर नहीं दे पाती है. ऐसी स्थिति में फोन अचानक बंद न हो, इसके लिए सिस्टम प्रोसेसर की स्पीड घटा सकता है. खासकर हैवी टास्क के दौरान इसका असर ज्यादा नजर आ सकता है.
कई ऐप्स लगातार सर्वर से डेटा लेते रहते हैं. नेटवर्क कमजोर या अस्थिर होने पर ये ऐप्स डेटा लाने में ज्यादा समय लेती हैं. ऐसे में फोन की पूरी परफॉर्मेंस ठीक होने के बावजूद यूजर्स को वह स्लो लग सकता है.
बहुत ज्यादा ऐप्स इंस्टॉल करने से स्टोरेज तेजी से भर सकती है. वहीं कई ऐप्स इस्तेमाल न होने पर भी बैकग्राउंड में चलते रहते हैं, जिससे RAM और प्रोसेसर पर लगातार लोड बना रहता है. इससे स्पीड और बैटरी दोनों पर असर पड़ सकता है.
ऐप्स और ऑपरेटिंग सिस्टम लगातार अपडेट होते रहते हैं. पुराने वर्जन कुछ नए सिस्टम के साथ सही तरीके से काम नहीं कर पाते और परफॉर्मेंस प्रभावित हो सकती है. इसलिए ऐप्स और सिस्टम को समय-समय पर अपडेट रखना फोन के बेहतर संचालन के लिए जरूरी है.