फोन बंद होने के बाद भी क्या-क्या चलता रहता है? जानें सच्चाई

स्मार्टफोन को बंद करते समय आमतौर पर हम मान लेते हैं कि अब फोन पूरी तरह बंद हो चुका है. स्क्रीन बंद होते ही ऐसा लगता है कि डिवाइस का हर सिस्टम रुक गया होगा. लेकिन असल में फोन का पावर ऑफ होने का ये मतलब नहीं होता है कि डिवाइस के हर इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम भी पूरी तरह से बंद हो चुके हैं. एडवांस स्मार्टफोन में कुछ ऐसे हार्डवेयर और सिस्टम होते हैं जिन्हें फोन बंद होने के बाद भी पावर मिलती रहती है. हालांकि इसका मतलब ये नहीं है कि फोन लगातार आपके कॉल, कैमरा या माइक्रोफोन को चला रहा है. आइए समझते हैं कि फोन बंद होने के बाद असल में क्या-क्या चलता रह सकता है.
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि जब आप फोन का पावर ऑफ ऑप्शन चुनते हैं तो ऑपरेटिंग सिस्टम नॉर्मली पर सभी ऐप्स और मेन एक्टिविटी को बंद करता है. इसके बाद रैम में चल रही ज्यादातर एक्टिविटी रुक जाती हैं और डिस्प्ले, प्रोसेसर, मोबाइल नेटवर्क तथा दूसरे बड़े कंपोनेंट्स की पावर सप्लाई काट दी जाती है. यानी फोन नॉर्मल इस्तेमाल की कंडिशन में नहीं रहता है. आप उसमें ऐप नहीं चला सकते, इंटरनेट ब्राउज नहीं कर सकते और नॉर्मल तरीके से कॉल भी नहीं कर सकते है.
आपको बता दें कि फोन बंद होने के बाद भी बैटरी डिवाइस के अंदर मौजूद रहती है. बैटरी से जुड़ा Power Management IC (PMIC) जैसे हार्डवेयर पावर की निगरानी और डिस्ट्रीब्यूशन से संबंधित काम कर सकते हैं. ये सिस्टम बैटरी के वोल्टेज, टेंपरेचर और चार्जिंग जैसी चीजों को कंट्रोल करने में जरूरी भूमिका निभाता है. खासकर जब फोन चार्जर से कनेक्ट हो, तब फोन बंद होने के बावजूद चार्जिंग से संबंधित इलेक्ट्रॉनिक्स एक्टिव रह सकते हैं.
कई स्मार्टफोन में अलार्म और पावर-ऑफ का तरीका फोन बनाने वाली कंपनी और ऑपरेटिंग सिस्टम पर निर्भर करता है. कुछ पुराने या स्पेशल सिस्टम वाले फोन बंद होने की कंडिशन में भी अलार्म जैसे फीचर्स चला सकते थे जबकि एडवांस स्मार्टफोन में नॉर्मल पावर ऑफ के बाद ये फीचर अक्सर उपलब्ध नहीं होता है. अगर किसी फोन में बंद होने के बावजूद अलार्म बजता है तो उसके पीछे लो-पावर हार्डवेयर या फर्मवेयर सपोर्ट हो सकता है.
इसके अलावा लोगों के मन में एक और सवाल होता है कि क्या फोन बंद होने के बाद भी लोकेशन ट्रैक हो सकती है. दरअसल, कुछ एडवांस डिवाइसों में फोन के पूरी तरह बंद होने के बाद भी लो-पावर वायरलेस हार्डवेयर के जरिए डिवाइस को ट्रैक करने वाला फीचर एक्टिव रहता है.
उदाहरण के लिए बता दें कि कुछ फोन और इकोसिस्टम ऐसे डिजाइन किए जाते हैं कि खोए हुए डिवाइस को खोजने के लिए हार्डवेयर पावर ऑफ के बाद भी एक्टिव रहता है. ये नॉर्मल GPS ट्रैकिंग जैसा नहीं होता है. इसमें डिवाइस बहुत कम एनर्जी में आसपास के वायरलेस सिग्नल या नेटवर्क की मदद से अपनी पहचान दूसरे तक पहुंचा देता है. हालांकि ये सुविधा हर फोन में नहीं होती और इसका काम करना मॉडल, सेटिंग्स और फोन बनाने वाली कंपनी के टेक्नोलॉजी पर निर्भर करता है.
जानकारी के लिए बता दें कि सिर्फ फोन बंद कर देने से कैमरा या माइक्रोफोन लगातार रिकॉर्डिंग करता है, ऐसा कहना सही नहीं है. नॉर्मल पावर ऑफ प्रोसेस में ऑपरेटिंग सिस्टम और कैमरा-माइक्रोफोन से जुड़ी नॉर्मल एक्टिविटी बंद हो जाती हैं. फिर भी सुरक्षा के नजरिए से फोन को पूरी तरह अलग कंडिशन में रखना हो तो बैटरी को अच्छे से डिस्कनेक्ट करना चाहिए. एडवांस फोन में बैटरी निकालना भी ज्यादातर मामलों में आसान नहीं होता है.
बताते चलें कि स्मार्टफोन में Restart और Power Off दोनों ही अलग तरीके से काम करते हैं. रीस्टार्ट में फोन बंद होकर दोबारा ऑपरेटिंग सिस्टम लोड करता है. वहीं पावर ऑफ में मेन सिस्टम को बंद कर देता है. अगर फोन में कोई छोटी सॉफ्टवेयर समस्या है तो रीस्टार्ट करने से ठीक हो सकता है. वहीं, अगर आप लंबे समय तक फोन का इस्तेमाल नहीं करना चाहते हैं तो पावर ऑफ करना ज्यादा बेहतर ऑप्शन रहता है.